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बरगाड़ी कांड: सवा चार साल से दोनों एजेंसियों की जांच में उलझा केस, सुप्रीम कोर्ट तक ऐेसे पहुंचा

Fri, 21 Feb 2020 01:50 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो राजीव शर्मा, फरीदकोट(पंजाब)
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पंजाब पुलिस - फोटो : ट्विटर हैंडल
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बरगाड़ी बेअदबी कांड को सवा चार साल से ज्यादा समय हो चुका है और अभी तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने वाले दोषियों की पहचान नहीं हो पाई है। पहले चरण की जांच में पंजाब पुलिस के विफल रहने पर तत्कालीन शिअद-भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में यह केस सीबीआई के हवाले कर दिया था, लेकिन सीबीआई की जांच भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब एक बार फिर से राज्य की कांग्रेस सरकार ने कानूनी अड़चन क्लीयर होने के बाद केस सीबीआई से लेकर पंजाब पुलिस के हवाले कर दिया है।
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जानकारी के अनुसार, लगभग सवा चार साल पहले 12 अक्टूबर 2015 को गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने का मामला सामने आया था। इस घटना को लेकर सिख संगत में व्यापक स्तर पर रोष फैल गया था, जिसके खिलाफ प्रदेश में जगह जगह रोष प्रदर्शन होने लगे और राज्य की तमाम मुख्य सड़कों पर चक्का जाम कर दिया गया।

लोगों में इस बात को लेकर रोष था कि बेअदबी को अंजाम देने वाले आरोपियों ने घटना से करीब साढ़े तीन माह पहले 1 जून 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी किया था।  घटना के करीब तीन माह बाद 24-25 सितंबर 2015 की रात को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में ही उसी गुरुद्वारा साहिब के बाहर अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर लगाकर पुलिस प्रशासन व सिख संगत को बेअदबी करने की चुनौती दी थी।
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पुलिस पावन ग्रंथ की चोरी व पोस्टर लगाने के मामलों का कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई और पोस्टर लगाने के महज 18 दिन बाद ही बरगाड़ी में पावन ग्रंथ की बेअदबी कर दी गई। इस मामले ने उस समय और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब 14 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी से ही सटे गांव बहिबल कलां व कोटकपूरा में बेअदबी मामले को लेकर सिख संगत के रोष धरनों को जबरन उठवाने के लिए पुलिस की ओर से फायरिंग की गई और बहिबल कलां में दो सिख नौजवानों किशन भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई और कोटकपूरा में करीब 100 लोग घायल हुए।

बेअदबी मामले से संबंधित तीन घटनाओं ( पावन स्वरूप चोरी करने, पोस्टर लगाने व बेअदबी करने) के थाना बाजाखाना में अलग अलग केस दर्ज हुए थे और पंजाब पुलिस के किसी नतीजे पर न पहुंचने पर तत्कालीन शिअद भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में तीनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

बेअदबी केस में विवादित रही है पंजाब पुलिस की जांच

बरगाड़ी बेअदबी केस की जांच संभालने जा रही पंजाब पुलिस पहले भी दो बार उक्त केस को सुझलाने का दावा कर चुकी है और दोनों ही बार उनकी जांच पर विवाद खड़ा हो चुका है। घटना के समय तत्कालीन ब्यूरो आफ इंवेस्टिगेशन के डायरेक्टर इकबालप्रीत सिंह सहोता की अध्यक्षता में एसआईटी ने 20 अक्टूबर 2015 को उक्त केस में सिख जत्थेबंदियों से जुड़े गांव पंजगराईं खुर्द ( मोगा) निवासी दो भाईयों रूपिंदर सिंह व जसविंदर सिंह को गिरफ्तार किया था।

हालांकि कई दिनों तक रिमांड में रखने के बाद भी पंजाब पुलिस उनके खिलाफ कोई सुबुत पेश नहीं कर पाई जिसके चलते उन्हें केस से डिस्चार्ज करना पड़ा था। इसके बाद साल 2018 में सिख जत्थेबंदियों के बरगाड़ी में मोर्चा लगाए जाने के बाद डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा की अध्यक्षता वाली पंजाब पुलिस की एसआईटी ने साल 2015 के ही मल्लके (मोगा) व गुरूसर(बठिंडा) के बेअदबी मामलों समेत मार्च 2011 में मोगा से सम्बंधित आगजनी के केस में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी और अपनी पड़ताल के आधार पर बरगाड़ी बेअदबी की तीनों घटनाओं में डेरा सच्चा सौदा की 45 मेंबरी प्रांतीय कमेटी के सदस्य महिंदरपाल बिट्टू समेत 10 डेरा अनुयायियों को आरोपी ठहराया था।

उनकी इस जांच रिपोर्ट को अपनी पड़ताल के बाद सीबीआई ने ना सिर्फ सिरे से खारिज कर दिया था बल्कि इस केस में सीबीआई कोर्ट मोहाली के पास क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी। हालांकि क्लोजर रिपोर्ट पर विवाद खड़ा होने पर सीबीआई ने इस केस की नए सिरे से पड़ताल शुरू की हुई थी। मालूम होकि बरगाड़ी बेअदबी मामले में पंजाब पुलिस की जांच रिपोर्ट में तथाकथित मुख्य आरोपी व डेरा सिरसा की 45 मेंबरी कमेटी के सदस्य महिंदरपाल बिट्टू की 22 जून 2019 को नाभा जेल में हत्या हो चुकी है।
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ऐसे पहुंचा सुप्रीम कोर्ट तक मामला

बेअदबी के मामले में पंजाब पुलिस द्वारा शुरुआत में तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं। बाद में जांच का जिम्मा पंजाब पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया गया था जहां दोबारा 13 नवंबर 2015 को तीन केस दर्ज किए गए। उधर, सीबीआई द्वारा इन तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी गई लेकिन पंजाब सरकार को अधिकृत प्रयोग के लिए इसकी कॉपी नहीं दी गई।

एजेंसी ने यह दलील दी की इसकी नए सिरे से जांच की जाएगी और सीबीआई पंजाब सरकार को समय-समय पर जांच संबंधी जानकारी देती रहेगी। वहीं, राज्य सरकार ने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा सीबीआई से जांच वापस लेने संबंधी प्रस्ताव पास किया गया है।

इसके अनुसार पंजाब सरकार द्वारा मामले की जांच सीबीआई को देने की सहमति को वापस लेने का नोटिफिकेशन 6 सितंबर, 2018 को जारी किया गया। इस प्रस्ताव और नोटिफिकेशन को एजेंसी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नोटिफिकेशन को कायम रखा था। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि सीबीआई ने सहमति वापस लेने के बाद एसएलपी दायर नहीं की थी लिए राज्य को मामलों की जांच करने का पूरा अधिकार है।
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