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कोविड-19 सर्वेक्षण में तैनात आशा वर्करों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

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पठानकोट में कोविड-19 सर्वेक्षण की प्रतियां जलातीं आशा वर्कर। - फोटो : PATHANKOT
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कोविड-19 सर्वेक्षण के लिए तैनात आशा वर्करों ने सोमवार को पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। जिला पठानकोट और गुरदासपुर से यूनियन पदाधिकारी राजविंद्र कौर, बलविंद्र कौर, रजनी समेत अन्यों ने बताया कि सर्वेक्षण फार्म आशा वर्करोंकी जान का दुश्मन बन गया है। रोजाना 25 घरों से जीरो लेवल की जानकारी ली जानी है, तब कहीं जाकर उन्हें 33 रुपए दिहाड़ी मिलेगी। कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में भी आशा वर्करों की ड्यूटी लगाई गई है पर उन्हें पीपीई किट तो दूर की बात, मास्क, दस्ताने समेत कोई सामान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि एक वर्कर के पास 1 हजार से 1500 तक की आबादी का काम है, सर्वेक्षण फार्म में पुलिस, सेहत विभाग, म्यूनिसिपल वर्कर, सफाई सेवक, सब्जी विक्रेता समेत हर घर जाकर उनका डाटा एकत्रित करना पड़ता है, उन्हें क्या पता कि किस व्यक्ति में वायरस है। ऐसे में आशा वर्करों की जान तो खतरे में है ही, उनका आर्थिक शोषण भी किया जा रहा है। उन्हें कोविड वायरस की सप्लाई चेन पता करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें भी रेगुलर मुलाजिम की तरह सुविधाएं दें। अन्यथा, शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए सर्वेक्षण फार्म जलाए जाएंगे।
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