पंजाब सरकार ने इस साल खजाने का मुंह खोलकर करोड़ों रुपये की दवा की खरीददारी की लेकिन यह कड़वा सच है कि अस्पताल में दाखिल मरीजों को 10 पैसे की टेबलेट पैरासिटामोल भी बाजार से खरीदनी पड़ रही है बाकी दवाएं तो दूर की बात है। हालात यह है कि जनता के करोड़ों रूपये से खरीदी दवाईयां उन तक नहीं पहुंच रही हैं। जालंधर सिविल अस्पताल में दाखिल आदमपुर के जगदीश की टांग में सूजन है, उसको चिकित्सकों ने स्कायनेप टेबलेट लिखकर दी है। यह उसे अस्पताल से नहीं मिली और बाजार से खरीदनी पड़ी। इस टेबलेट का साल्ट पैरासिटामोल -500 मिलीग्राम है। थोक में इसकी कीमत 10 पैसे के आसपास है। उसको एंटी बायोटिक इंजेक्शन बाजार से लिखकर दिए गए, जिसकी एक इंजेक्शन की कीमत 150 रूपये है। हालांकि सरकार द्वारा दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 37 इंजेक्शनों की खरीद की है, जिसमें कई एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन भी हैं। अस्पताल में इलाजरत मंदीप कुमार व विनोद कुमार संतोखपुरा इलाके रहने वाले हैं और झगड़े के केस में अस्पताल में दाखिल हुए हैं। उनको तो जितनी दवाएं लिखकर दी गई, वह सारी बाजार से हजारों रूपये देकर खरीदी गई। इनमें डिक्लोफिनेक सोडियम व सिरेशोपेपटिडेस का कंबीनेशन, सेफिक्सिाइम -200 मिलीग्राम की टेबलेट भी है। यह दवाएं सरकार ने अपनी खरीददारी सूची में रखी हुई हैं।