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आईटी उद्योगों की जमीन अलाटमेंट नीति पर भिड़े सुखबीर-कैरों

Sun, 01 Dec 2013 12:01 AM IST
हमीर सिंह
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पंजाब में आईटी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई जमीन अलाटमेंट नीति पर डिप्टी सीएम सुखबीर बादल और आईटी और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों भिड़ गए।
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कैरों की दलीलों के चलते मंत्रिमंडल की बैठक लंबे समय तक चली और नीति में कई तब्दीलियां करने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार आदेश प्रताप कैरों पिछले कई महीनों से मोहाली और इसके आस पास के उद्योगपतियों से आईटी के लिए जमीन अलाटमेंट नीति के तहत विचार-विमर्श कर रहे थे।

शनिवार को मंत्रिमंडल में जब सुखबीर बादल ने नीति के बारे में जानकारी दी तो आदेश प्रताप ने इसकी मूल धारणा पर ही सवाल खड़े कर दिए।

सुखबीर ने कई बार जवाब देने का प्रयास किया, लेकिन आदेश प्रताप तथ्यों के साथ तर्क देते रहे और कई बातें मनवाने में कामयाब भी रहे।

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नीति में मोहाली में जो 402 एकड़ जमीन है, उसमें आधा एकड़ और एक एकड़ वाले प्लाटों पर करीब 30 उद्यमियों के लिए जगह थी।

आदेश प्रताप का तर्क था कि आईटी क्षेत्र में छोटे और मध्यम वर्ग के उद्यमियों को बराबर की जगह दिए बिना नीति सफल नहीं हो पाएगी। उनके बार-बार दिए तर्कों के तहत 90 एकड़ के करीब जमीन छोटे उद्यमियों के लिए रखने पर सहमति हुई।
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इसमें सौ के करीब छोटे उद्यमी भी आ पाएंगे। एक और पहलू लीज मनी का था। आदेश प्रताप का तर्क था कि लीज मनी बराबर होनी चाहिए, लेकिन प्रस्तावित नीति में बड़ी कंपनियों के लिए यह कम और छोटे के लिए ज्यादा थी।

पैनेल्टी भी प्रस्तावित नीति में चार फीसदी थी, जिस पर आदेश का तर्क था कि बाद में भी इतनी ज्यादा पैनेल्टी भरी नहीं जाएगी और इसको माफ करने के लिए सरकार के पास बार-बार आवेदन आएंगे।

इसे तर्कसंगत बनाया जाए और एक फीसदी कर देनी चाहिए। इन बातों को स्वीकार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान अन्य कई मंत्री सुखबीर की ओर ही खड़े दिखाई दिए और मुख्यमंत्री खुद पूरी तरह खामोश रहे।
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गौरतलब है कि आदेश प्रताप कैरों उप मुख्यमंत्री के बहनोई हैं।
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