पंजाब से पाकिस्तान को बिजली बेचने का रास्ता साफ हो गया है। इस दिशा में पहल करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अगुवाई में हुई कैबिनेट की मीटिंग में इससे संबंधित एमओयू साइन करने को मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही पंजाब में भी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, क्योंकि यह प्रोजेक्ट डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
पाकिस्तान को बिजली बेचने की रूपरेखा डिप्टी सीएम के पाकिस्तान दौरे के समय बनी थी। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से कहा था कि पंजाब सरकार उन्हें बिजली बेचना चाहती है।
वह इस संबंध में भारत सरकार से बात करें। दिसंबर में पाक पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ भारत आए थे। उन्होंने पाकिस्तान को भारत से बिजली मिलने की संभावनाएं तलाशी थीं।
शहबाज शरीफ ने दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से भी मीटिंग की थी। इसमें दोनों देशों के बीच बिजली कारोबार पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
शहबाज शरीफ हरियाणा में महात्मा गांधी पावर प्रोजेक्ट देखने भी गए थे। वहीं, पंजाब के डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने उन्हें भरोसा दिया था कि पंजाब जल्द ही पॉवर सरप्लस राज्य होगा।
उसके बाद वह पाकिस्तान को बिजली देने में सक्षम होंगे। पावर विभाग के प्रमुख सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने कहा कि राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों का उद्घाटन हो चुका है।
तीसरे थर्मल प्लांट का काम भी आखिरी चरण में है। पाक सरकार की पहल के बाद यदि दोनों देशों के बीच पावर ट्रेड के संबंध में एमओयू साइन होता है, तो योजना को अमलीजामा पहनने में दो साल लग जाएंगे।
तब तक पंजाब में बिजली उत्पादन और खतप के लिहाज से राज्य 500 मेगावाट बिजली पाकिस्तान को देने में समर्थ होगा। इसके लिए वाघा और अटारी में पावर ग्रिड स्थापित किए जाएंगे।