पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद से उठ रहे बगावती सुरों के बीच अब हिंदू नेताओं ने भी प्रदेश नेतृत्व को आंखें दिखाने की तैयारी कर ली है।
नेताओं का कहना है कि पहले विस चुनाव में टिकट वितरण में हिंदुओं को नजरंदाज किया गया, अब संगठन में भी खास अहमियत नहीं दी गई।
राज्य के दिग्गज हिंदू नेताओं को एक मंच पर लाने की कवायद शुरू हो गई है।
हिंदू नेताओं को एक प्लेटफार्म पर लाने की कमान विधायक अश्वनी सेखड़ी ने संभाली है। सूत्र बताते हैं कि शनिवार को अमृतसर में एक मीटिंग होने जा रही है।
इसमें मालवा, माझा व दोआबा के हिंदू नेता शामिल होंगे। मीटिंग में ही अगले कदम के बारे में रणनीति तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार इस मीटिंग में जालंधर के एक पूर्व विधायक, होशियारपुर के एक पूर्व मंत्री, माझा के एक पूर्व मेयर, अमृतसर व गुरदासपुर से दो पूर्व विधायक शामिल होंगे। इनके अलावा मालवा में बठिंडा और आसपास के दो दिग्गज हिंदू नेता भी मीटिंग में पहुंचेंगे।
लुधियाना के एक विधायक के भी शामिल होने की संभावना है। हिंदू नेताओं में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि पार्टी में लगातार उनको नजरंदाज किया जा रहा है, जबकि, हिंदू पार्टी का प्रमुख वोट बैंक है।
शहरी क्षेत्रों से कांग्रेस को बढ़त दिलाने में इस वोट बैंक का अहम रोल रहा है। शहरी हिंदुओं को नजरंदाज करने का खामियाजा पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनाव में भुगत चुकी है।
सत्ता और संगठन में हिंदू नेताओं को दरकिनार किए जाने से हिंदू वोट बैंक पर पकड़ भी लगातार कमजोर होती जा रही है।
इससे हिंदू नेताओं का जनाधार भी खतरे में पड़ गया है। मीटिंग में इसी मुद्दे पर मंथन किया जाएगा कि हाईकमान तक यह बात पहुंचाई जाए।
अकाली दल से जीते 11 हिंदू
कांग्रेसी हिंदू नेताओं को सबसे बड़ी आशंका वोट बैंक खिसकने को लेकर है। उनका कहना है कि एक तरफ कांग्रेस हिंदुओं को नजरंदाज कर रही है।
दूसरी तरफ अकाली दल लगातार हिंदुओं में पकड़ मजबूत बना रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी अकाली दल ने 12 हिंदू नेताओं को टिकट दिए। इसमें से 11 चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचे।