सीबीआई ने फिरोजपुर में पांच वर्ष पहले एक काउंसलर की हत्या के आरोप में नामजद तीन आरोपियों को क्लीन चिट देने वाले तत्कालीन एसपी (डी) की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने संबंधित अधिकारी के अलावा उसके उस समय के स्टाफ से भी पूछताछ की है।
जानकारी के अनुसार फिरोजपुर के काउंसलर कुलवंत सिंह की हत्या के आरोप में नामजद आरोपियों जतिंदर मोहन उर्फ कुक्कू प्रधान ने बेकसूर होने संबंधी आईजी क्राइम को अर्जी दी थी। उन्होंने यह अर्जी जांच के लिए मोगा में तैनात एक तत्कालीन एसपी (डी) को सौंपी थी।
उन्होंने सात मार्च 2011 को अपनी रिपोर्ट में आरोपियों जतिंदर मोहन उर्फ कुक्कू प्रधान, चरन दास हांडा और सुरजीत सिंह सीता को क्लीन चिट दे दी थी। जांच के आधार पर एडीजीपी अपराध ने आरोपियों को अदालत से डिस्चार्ज करवाने का फिरोजपुर पुलिस को आदेश जारी कर दिया।
फिरोजपुर के तत्कालीन जिला पुलिस प्रमुख डॉ.कौतभ शर्मा ने 21 मार्च 2011 को एडीजीपी को अर्ध सरकारी पत्र के जरिए मोगा के तत्कालीन एसपी (डी) की रिपोर्ट पर सवाल खडे़ किए थे। इसके बाद जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई। इस विशेष जांच टीम की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ 21 जून 2011 को अदालत में आरोप पत्र (चालान) पेश कर दिया गया था।
आरोपी पेश न हुए और अदालत ने उन्हें भगोड़ा करार दे दिया। इसके बाद 23 नवंबर 2011 को पुलिस ने अदालत में केस रद्द करने की रिपोर्ट पेश कर दी। इसके बाद नामजद आरोपियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह केस रद्द करने के लिए अर्जी दायर कर दी।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपियों की केस रद्द करने की अर्जी को खारिज करते समय यह मामला सीबीआई को सौंप दिया। मामले की जांच के दौरान तीनों आरोपियों को क्लीन चिट देने वाले मोगा के तत्कालीन एसपी (डी) की भूमिका के बारे में जांच का आदेश दिया गया था।
फिरोजपुर के काउंसलर कुलवंत सिंह को जमीनी विवाद की रंजिश के कारण एक दिसंबर 2010 को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। थाना सिटी फिरोजपुर पुलिस ने पहले जानलेवा हमले का केस दर्ज और काउंसलर की मौत के बाद यह केस हत्या में तब्दील कर दिया था।