जम्मू-कश्मीर के राजौरी में बलिदान होने वाले गांव रामगढ़ सरदारां के अजय सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए। अजय सिंह को उनके पिता चरणजीत सिंह ने मुखाग्नि दी। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जनसैलाब उमड़ा। शनिवार सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव रामगढ़ सरदारां में पहुंचा था। संस्कार से पहले छह बहनों ने अपने इकलौते भाई के सिर पर सेहरा सजाया।
इसके बाद घर से श्मशान घाट करीब 2 किलोमीटर तक अंतिम यात्रा निकली। इसमें लुधियाना की डीसी सुरभि मलिक सहित कई अधिकारी शामिल हुए। अंतिम यात्रा को श्मशान घाट तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
उनकी मां एक ही बात बोल रही है कि मुझे मेरे बेटे पर गर्व है। वहीं डीसी ने कहा परिवार की तीन बेटियां और हैं। उन्हें किसी तरह की मुश्किल नहीं आने देंगे। अजय सिंह की वीरवार सुबह नौशेरा सेक्टर में बारूदी सुरंग में विस्फोट होने से जान चली गई थी।
छह बेटियों के बाद देखा था बेटा
अजय सिंह के पिता चरणजीत सिंह ने बताया कि छह बेटियों के बाद उन्होंने बेटा देखा था। वे खुद मेहनत मजदूरी करते थे। कड़ी मेहनत करके बेटे का पालन पोषण किया। पत्नी भी काम करती थी।
बेटियां भी प्राइवेट नौकरी करती थीं। बेटा खुद कभी पेंट करने जाता था तो कभी राजमिस्त्री के साथ दिहाड़ी पर जाता था। 12वीं पास करने के बाद फरवरी 2022 में बेटा भर्ती हुआ। अब आस थी कि बेटा परिवार का सहारा बन गया है, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ऐसे बेटा शहीद हो जाएगा। शहादत पर गर्व है, लेकिन बेटे का दुख कभी नहीं भूला जा सकता।