जिला मॉडर्न जेल नशे के आदी कैदियों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। पिछले दो साल में जेल में बंद करीब 25 कैदियों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर नशे की लत से हुई बीमारियों के कारण मौत का शिकार बने हैं जबकि 5-6 कैदियों ने नशे के अभाव में आत्महत्या की है।
पिछले साल तोड़फोड़ के एक मामले में हुई मजिस्ट्रेट जांच में सामने आया था कि जेल में बंद 80 प्रतिशत कैदी नशा करने के आदी हैं और यह नशा ही उनके लिए मौत का कारण बन रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच में एसडीएम कोटकपूरा दर्शन सिंह ग्रेवाल ने पाया था कि कुछ जेल कर्मी भी कैदियों को नशा उपलब्ध करवा रहे हैं।
वर्तमान में यहां पर करीब 2350 कैदी बंद हैं और इन्हें दिन भर व्यस्त रखने के लिए जेल प्रशासन के पास कोई खास काम नहीं है। ज्यादातर कैदियों का नशे का आदी होना भी जेल प्रशासन के लिए परेशानियां खड़ी कर रहा है और नशे के कारण वे मौत का ग्रास बन रहे है। पिछले दो माह के दौरान जेल प्रशासन ने भी करीब दर्जन कैदियों के खिलाफ ड्रग्स रखने के आरोप में मामले दर्ज करवाए गए हैं और पेशी से लौटने पर कैदियों को गहन तलाशी के बाद ही जेल में दोबारा एंट्री मिलती है।
नशा छुड़ाओ केंद्र में 100 कैदी
नशा विरोधी मुहिम के कारण इन दिनों मॉडर्न जेल में भी कैदियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है और नए कैदियों में ज्यादातर नशे के आदी हैं। जेल अधीक्षक कुलविंदर सिंह थियाड़ा के अनुसार जेल के नशा छुड़ाओ केंद्र में करीब 100 कैदी उपचाराधीन हैं और इन्हें पर्याप्त दवाएं भी मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इन कैदियों को व्यस्त रखने के लिए टीवी, पुस्तकें और खेलों का सामान भी दिया गया है। कैदियों के इलाज के लिए नशा छुड़ाओ केंद्र में दो डॉक्टर, 7 फार्मासिस्ट, 7 मेल स्टाफ और 4 महिला स्टाफ है। वहीं नशे के आदी कैदियों की काउंसिलिंग के लिए मेडिकल कॉलेज फरीदकोट से एक मनोचिकित्सक को भी अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया है।
80 फीसदी कैदी करते हैं नशा
फरीदकोट की माडर्न जेल में पिछले वर्ष 22 अप्रैल को अपने साथियों की लगातार मौतों को लेकर कैदियों का गुस्सा भड़क उठा था और वे पथराव, आगजनी और तोड़-फोड़ पर उतारू हो गए थे। उस दिन हालात पर काबू पाने के लिए छह जिलों की पुलिस को लाठीचार्ज, हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। इस घटना की न्यायिक और मजिस्ट्रेट जांच के दौरान भी जेल में ड्रग्स कारोबार के अहम खुलासे हुए थे। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि जेल में बंद 80 प्रतिशत कैदी नशा करने के आदी हैं और यह नशा ही उनके लिए मौत का कारण बन रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच में एसडीएम कोटकपूरा दर्शन सिंह ग्रेवाल ने पाया था कि कुछ जेल कर्मी भी कैदियों को नशा उपलब्ध करवा रहे हैं।
जेल की क्षमता दो हजार कैदी
राज्य सरकार ने 112 करोड़ रुपये की लागत से स्थानीय तलवंडी रोड पर 72 एकड़ जमीन में मॉडर्न जेल का निर्माण करवाया था। इसका उद्घाटन 8 नवंबर 2011 को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किया था। उद्घाटन के समय से ही यहां पर संसाधनों का बेहद अभाव है। करीब दो हजार क्षमता वाली इस जेल में आसपास के जिलों के कैदियों को भी रखा जा रहा है लेकिन सुविधाएं न मिलने के कारण कैदी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यहां पर पीने के पानी से लेकर खाने की क्वालिटी को लेकर कई बार विवाद खड़ा हो चुका है। जेल में अस्पताल भी बनाया गया है, लेकिन स्टाफ की हमेशा कमी बनी रहती है। कहने को तो नशा छुड़ाओ केंद्र भी है लेकिन दवाओं और माहिरों का यहां भी अभाव है। जेल के भीतर एक फैक्टरी भी बनाई गई है लेकिन फंड के अभाव में यहां पर कोई भी बड़ा काम शुरू नहीं करवाया जा सका है।