कांग्रेस के लिए इस बार आम आदमी पार्टी ने वह रोल निभाया तो पिछले विधानसभा चुनाव में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) ने निभाया था।
‘आप’ की चुनाव मैदान में मौजूदगी के कारण कई सीटों पर जीत कांग्रेस के हाथ से फिसल गई।
कुछ सीटों पर तो आम आदमी पार्टी ने शानदार जीत हासिल की तो कुछ जगह अकाली-भाजपा के उम्मीदवार जीते हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस जीत के बहुत करीब थी, लेकिन चुनाव मैदान में तीसरे विकल्प के रूप में पीपीपी थी।
पंजाब पीपुल्स पार्टी को पांच फीसदी से ज्यादा वोट मिला। जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ।
कई जगह तो कांग्रेस के उम्मीदवार मामूली अंतर से हार गए। अगर उन सीटों पर पीपीपी के उम्मीदवार न होते तो कांग्रेस आसानी से जीत सकती थी।
चुनाव के बाद मंथन में कांग्रेस पार्टी ने भी यह बात स्वीकार की थी। इस बार वही काम आम आदमी पार्टी ने किया।
‘आप’ ने कांग्रेस और शिअद-भाजपा, दोनों के ही वोट बैंक में सेंध लगाई। कांग्रेस पार्टी कई जगह जीतते-जीतते रह गई।
आनंदपुर साहिब सीट पर विजेता शिअद को 3.47 लाख वोट मिले, तो कांग्रेस को 3.23 लाख। यहां ‘आप’ को 3.06 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं।
फिरोजपुर में कांग्रेस करीब 31 हजार वोटों से हारी, यहां ‘आप’ को 1.13 लाख वोट मिले।
होशियारपुर में कांग्रेस करीब 13 हजार वोट से हारी, यहां आम आदमी पार्टी को 2.13 लाख वोट मिले।
बठिंडा में कांग्रेस 19 हजार वोटों से हारी, यहां भी आप को 87 हजार से ज्यादा वोट मिले। पटियाला और लुधियाना में कांग्रेस का सीधा मुकाबला ही आम आदमी पार्टी से रहा।