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सड़क हादसे में गृहिणी की माैत: तुलसी देवी के परिजनों को मिलेगा 13 लाख मुआवजा, 45 दिन में भुगतान के आदेश

Mon, 19 Oct 2026 11:34 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

25 मई 2025 को तुलसी देवी अपने पति दिनेश चंद्र के साथ स्विफ्ट डिजायर कार में जा रही थीं। कार दिनेश चंद्र चला रहे थे और तुलसी देवी आगे की सीट पर बैठी थीं। शाम करीब सवा चार बजे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पोंटा साहिब के निकट जोहड़ोन के पास सामने से गलत दिशा में आ रही पिकअप ने उनकी कार को टक्कर मार दी।
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court - फोटो : एआई
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विस्तार
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सड़क हादसे में जान गंवाने वाली तुलसी देवी के परिजनों को 13 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ के पीठासीन अधिकारी अमित कुमार ग्रोवर ने बीमा कंपनी और मृतका के परिजनों के बीच हुए समझौते के आधार पर मुआवजा देने का अवार्ड सुनाया है। 
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आदेश के अनुसार मृतका के पति दिनेश चंद्र को आठ लाख रुपये और बेटे रोहित चंद्र को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। बीमा कंपनी को अवार्ड की तारीख से 45 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में राशि नहीं देने पर याचिका दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।

गलत दिशा से आई पिकअप ने कार को मारी थी टक्कर
याचिका के अनुसार 25 मई 2025 को तुलसी देवी अपने पति दिनेश चंद्र के साथ स्विफ्ट डिजायर कार में जा रही थीं। कार दिनेश चंद्र चला रहे थे और तुलसी देवी आगे की सीट पर बैठी थीं। शाम करीब सवा चार बजे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पोंटा साहिब के निकट जोहड़ोन के पास सामने से गलत दिशा में आ रही पिकअप ने उनकी कार को टक्कर मार दी।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि पिकअप चालक तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहा था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तुलसी देवी को गंभीर चोटें आईं। उनकी एक बांह पूरी तरह कट गई थी और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें पोंटा साहिब के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में दिनेश चंद्र भी घायल हुए थे।

माजरा थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
हादसे के संबंध में 25 मई 2025 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के माजरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद मृतका के पति और बेटे ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत न्यायाधिकरण में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में 70 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई थी।

याचिका में बताया गया कि तुलसी देवी की उम्र करीब 60 वर्ष थी और वह गृहिणी थीं। परिवार के अनुसार, घरेलू कामकाज में उनके योगदान का अनुमानित मूल्य 20 हजार रुपये प्रतिमाह था। उनकी मृत्यु से परिवार को आर्थिक और भावनात्मक नुकसान हुआ।

समझौते के आधार पर तय हुई मुआवजा राशि
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और पिकअप का बीमा करने वाली रॉयल सुंदरम इंश्योरेंस कंपनी के बीच समझौता हो गया। बीमा कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता ने मृतका के परिजनों को पूर्ण और अंतिम मुआवजे के रूप में 13 लाख रुपये देने की सहमति दी। याचिकाकर्ता दिनेश चंद्र और उनके अधिवक्ता ने भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने समझौते के आधार पर मुआवजे का अवार्ड पारित कर दिया।

45 दिन में करना होगा भुगतान
न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह दोनों याचिकाकर्ताओं को उनके हिस्से की राशि अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से अदा करे। भुगतान की समयसीमा अवार्ड की तारीख से 45 दिन निर्धारित की गई है। यदि बीमा कंपनी निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करती है, तो उसे याचिका दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
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