टारगेट को नेस्तनाबूत करता सेना का स्वदेशी ड्रोन
- फोटो : सेना
जरूरत के अनुसार तैयार हो रहे ड्रोन
वेस्टर्न कमांड के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि बड़े स्तर पर स्वदेशी ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इस काम में तेजी आई है और अब तक रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन बनाए जा चुके हैं। सेना की जरूरतों के अनुसार इन ड्रोन की डिजाइन और क्षमता तय की जा रही है।
ड्रोन की रेंज, पेलोड क्षमता, आकार और मिशन के अनुसार उनकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न यूनिटों की कार्यशालाओं में तकनीकी विंग के अधिकारी और जवान इन्हें तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन ड्रोन में लगाए जाने वाले हथियार और गोला-बारूद भी सेना खुद ही विकसित कर रही है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
भविष्य के युद्ध में निर्णायक भूमिका
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल हरबख्श सिंह के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक युद्ध के नतीजे तय करेंगे। ऐसे में स्वदेशी ड्रोन निर्माण पर जोर देना जरूरी और रणनीतिक रूप से बेहद अहम कदम है। उन्होंने कहा कि सेना का खुद ड्रोन निर्माण में जुटना न सिर्फ एक चुनौतीपूर्ण प्रयास है, बल्कि इससे देश की विदेशी निर्भरता भी कम होगी और रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।