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पंजाब दौरे पर केंद्रीय टीम: अभी राहत की कोई उम्मीद नहीं; किसानों का दर्द- कब बिकेगी हमारी फसल?

Tue, 14 Apr 2026 07:49 PM IST
Ankesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, खन्ना (पंजाब)

सार

बारिश और खराब मौसम के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं खरीद प्रक्रिया में आ रही रुकावटों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसान लंबे समय से अपनी फसल बेचने के इंतजार में हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि अभी तक कोई ठोस राहत नजर नहीं आ रही।
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गेहूं फसल में नमी की जांच करती टीम। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पंजाब में बारिश से खराब हुई गेहूं की फसल के बीच केंद्रीय टीमों का दौरा जारी है, लेकिन फिलहाल किसानों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही। लुधियाना जिले की कई अनाज मंडियों का दौरा करते हुए केंद्रीय टीम ने गेहूं के सैंपल एकत्र किए।

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एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में भी टीम ने पहुंचकर बारिश से प्रभावित फसल का जायजा लिया।डॉ. वासुदेव की अगुवाई में पहुंची टीम ने मंडी में विभिन्न खरीद एजेंसियों की ढेरियों में से गेहूं के सैंपल लिए। इन सैंपल्स को लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच के बाद तैयार रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

बारिश और खराब मौसम के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं खरीद प्रक्रिया में आ रही रुकावटों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसान लंबे समय से अपनी फसल बेचने के इंतजार में हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि अभी तक कोई ठोस राहत नजर नहीं आ रही। खन्ना मंडी में केंद्रीय टीम के दौरे के दौरान किसानों ने खुलकर अपना दर्द भी बयां किया।
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इस मौके पर एएफएसओ हरभजन सिंह ने बताया कि टीम को जमीनी हालातों से पूरी तरह अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ खन्ना ही नहीं, बल्कि पटियाला से लेकर बठिंडा और पूरे मालवा क्षेत्र में बारिश के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने विभिन्न इलाकों में टीमें भेजी हैं, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही किसानों के लिए कोई राहत का रास्ता निकलेगा।

दूसरी ओर, मंडी में मौजूद किसानों ने केंद्रीय टीम के सामने अपनी परेशानियां रखीं। किसानों का कहना है कि बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हो गई है, जिसके चलते खरीद एजेंसियां मापदंडों का हवाला देकर फसल खरीदने से इनकार कर रही हैं। इस स्थिति ने किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है।

किसानों ने कहा कि वे पूरे साल मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब हो जाती है, तो उन्हें सरकार से मदद की उम्मीद होती है। उन्होंने मांग की कि मापदंडों में ढील दी जाए, फसल की तुरंत खरीद सुनिश्चित की जाए और नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।

मंडी की इस स्थिति ने जहां किसानों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं खरीद व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि केंद्रीय टीम के दौरे से उम्मीद तो जगी है, लेकिन जब तक कोई ठोस फैसला नहीं होता, तब तक किसानों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही।

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