पंजाब को नशामुक्त कर रंगला पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महानगर से सूरमा मुहिम का आगाज किया। गुरु नानक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उन युवाओं को सूरमा की उपाधि देकर सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से नशे के जाल को काट दिया है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के इन दावों और नई मुहिम पर विपक्षी खेमे से बेहद तीखा हमला हुआ है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सूरमा मुहिम को सरकार का एक पब्लिसिटी स्टंट और घिनौना मजाक करार दिया। बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि पंजाब तो सदियों से ही असली सूरमाओं, योद्धाओं और शूरवीरों की पवित्र धरती रहा है, लेकिन सत्तासीन सरकारों की गलत नीतियों, नाकामी और लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण ही आज सीमावर्ती राज्य में नशा तस्करी, सट्टेबाजी और लूटपाट अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सूबे की जवानी को इस तरह बर्बाद करने के बाद अपने प्रोपेगेंडा का नाम सूरमा रखना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने नसीहत दी कि पंजाब के आम लोगों को सूरमा बनाने की नसीहत देने से पहले मुख्यमंत्री को खुद अपनी सभी गलत और गंदी आदतों का परित्याग करना चाहिए और खुद एक मिसाल बनकर दिखाना चाहिए।
समारोह के दौरान मंच पर मौजूद कई युवाओं ने आपबीती सुनाते हुए इस बात को साझा किया कि कैसे इस नई मुहिम और बदलाव की सोच ने उनकी मरती हुई जिंदगी में दोबारा सांसें फूंकी हैं। एक युवा ने बताया कि नशे की भयानक लत के चलते वह इस कदर अंधा हो चुका था कि अपने पिता की मृत्यु के ठीक बाद उसने उनकी जेब से पैसे चुरा लिए थे, जिसका पछतावा उसे जिंदगी भर रहेगा। वहीं, एक अन्य युवक ने बताया कि उसने नशे की तलब पूरी करने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक औने-पौने दामों में बेच दी थी, लेकिन नशा छोड़ने के बाद अब वह दिन-रात कड़ी मेहनत करके उस जमीन के हिस्से को दोबारा खरीदने में कामयाब रहा है।