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पूर्व डीआईजी भुल्लर को राहत नहीं: जमानत याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, HC ने खारिज की थी याचिका

Fri, 10 Apr 2026 04:39 PM IST
Ankesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सीबीआई ने हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ 29 अक्तूबर को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। इसके बाद 5 नवंबर को उन्हें इस केस में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। उस समय वह पहले से ही रिश्वत से जुड़े एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
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डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने उन्हें यह छूट दी कि यदि दो महीने के भीतर मामले का ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि फिलहाल इस याचिका पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर ने फरवरी में हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। भुल्लर के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि भुल्लर के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब उनके फरार होने का जोखिम नहीं है।
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यह मामला अक्तूबर 2025 का है, जब सीबीआई ने भुल्लर को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि रोपड़ रेंज के डीआईजी रहते हुए उन्होंने एक निजी व्यक्ति के जरिए रिश्वत की मांग की थी, ताकि एक एफआईआर में शिकायतकर्ता को राहत दी जा सके और उसके कारोबार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न हो।

सीबीआई ने 16 अक्तूबर को चंडीगढ़ में ट्रैप लगाकर एक बचौलिए को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद भुल्लर को भी गिरफ्तार किया गया। 

जनवरी में चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वहीं हाईकोर्ट में भुल्लर के वकील ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल का 30 वर्षों का बेदाग सेवा रिकॉर्ड रहा है और मामला दुर्भावनापूर्ण आरोपों पर आधारित है।

दूसरी तरफ सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि रिकॉर्डेड बातचीत, व्हाट्सएप डेटा और जांच के दौरान की गई कॉल से रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टता साबित होते हैं।

हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए भुल्लर को यह छूट दी थी कि वे मामले के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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