याचिका कनिष्का भूषण व अन्य ने दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे चंडीगढ़ के एससी अभ्यर्थी हैं और उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन ने निर्धारित प्रारूप पर एससी प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर वे पूर्व के वर्षों में भी दाखिले के लिए पात्र रहे हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में एमबीबीएस दाखिले की एससी श्रेणी की काउंसलिंग पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही यूटी प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिकाकर्ता को चंडीगढ़ प्रशासन ने एससी श्रेणी में दाखिले के लिए अयोग्य ठहराते हुए दूसरे राज्यों से आए प्रवासी एससी अभ्यर्थी करार दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जारी एससी प्रमाणपत्र के आधार पर पहले भी दाखिले की प्रक्रिया में पात्र माने जाते रहे हैं और उन्होंने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ में ही पूरी की है।
याचिका कनिष्का भूषण व अन्य ने दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे चंडीगढ़ के एससी अभ्यर्थी हैं और उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन ने निर्धारित प्रारूप पर एससी प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर वे पूर्व के वर्षों में भी दाखिले के लिए पात्र रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्होंने नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई चंडीगढ़ में की है। ऐसे में उन्हें चंडीगढ़ का वास्तविक निवासी अभ्यर्थी माना जाना चाहिए।
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याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने देश के किसी अन्य हिस्से में एससी श्रेणी के आधार पर एमबीबीएस सीट का दावा नहीं किया है। उनका एकमात्र दावा चंडीगढ़ की एससी आरक्षित सीटों पर है। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि अगस्त के पहले सप्ताह में एमबीबीएस दाखिले के लिए विवरणिका जारी की गई थी। आठ अगस्त 2026 की विवरणिका में एससी अभ्यर्थियों के लिए यह शर्त रखी गई थी कि चंडीगढ़ की एससी आरक्षित सीटों का लाभ लेने के लिए प्रमाणपत्र चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जारी होना चाहिए। यदि प्रमाणपत्र किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से जारी हुआ है तो अभ्यर्थी को एससी आरक्षित सीट के बजाय सामान्य श्रेणी में माना जाना था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके प्रमाणपत्र खुद चंडीगढ़ प्रशासन ने जारी किए हैं। इसलिए विवरणिका में दी गई शर्त के अनुसार उन्हें एससी श्रेणी से बाहर करने का कोई आधार नहीं था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी मुद्दा उठाया कि चंडीगढ़ पूर्ववर्ती संयुक्त पंजाब से अलग होकर अस्तित्व में आया था। उनके अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने अभी तक भारत सरकार के उन निर्देशों को पूरी तरह नहीं अपनाया है, जिनके तहत दूसरे राज्यों से आए एससी अभ्यर्थियों को आरक्षित सीटों का लाभ देने से रोका जाता है। ऐसे में केवल उन्हें ‘प्रवासी एससी’ बताकर एमबीबीएस की आरक्षित सीटों से वंचित करना उचित नहीं है।