पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को चेयरमैन कोटे के तहत उपभोक्ताओं को ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करना होगा। कॉरपोरेशन आचार संहिता का हवाला देते हुए इससे इन्कार नहीं कर सकता क्योंकि संबंधित मामले में जरूरी औपचारिकताएं आदर्श आचार संहिता लगने से पहले पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा उपभोक्ता को 10 हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा।
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की चेयरमैन जस्टिस दया चौधरी, सदस्य सिमरजोत कौर और विश्वकांत गर्ग की बेंच ने यह आदेश दिया है। फैसला बठिंडा के बाघा गांव की गुरजीत कौर की ओर से दी गई शिकायत के संदर्भ में दिया गया है। शिकायतकर्ता को चेयरमैन के विवेकाधीन कोटे से ट्यूबवेल कनेक्शन जारी किया गया था। इसी तरह के कुछ अन्य मामले भी थे। कॉरपोरेशन ने जिला आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि जिला आयोग का फैसला गलत तथ्यों व सबूतों को गलत तरीके से पेश करने पर आधारित है।
कॉरपोरेशन की ओर से कहा गया कि शिकायत करने वाले ने चेयरमैन के विवेकाधीन कोटे के तहत ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल गई थी लेकिन उसके बाद 4 जनवरी 2017 से विधानसभा चुनाव के कारण राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। शिकायत करने वाले को न तो कोई डिमांड नोटिस जारी किया गया और न ही उसने जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। उन्हें कोई डिमांड नोटिस भी जारी नहीं किया गया था और उसने कनेक्शन जारी करने के लिए जरूरी रकम भी जमा नहीं की थी।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि 28 दिसंबर 2016 को उसने 22100 रुपये कॉरपोरेशन में जमा करवाए थे।आदर्श आचार संहिता एक खास समय के लिए लगाई गई थी और उसके हटने के बाद औपचारिकताएं पूरी करने पर ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने में कोई रोक नहीं थी। डिमांड नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी बाद में शुरू की जा सकती थी। लिहाजा शिकायत करने वाले का अधिकार नहीं छीना जा सकता, जो उसे आचार संहिता लागू होने से पहले मिल गया था, क्योंकि उसने ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आचार संहिता से पहले आवेदन किया था और इसके लिए स्वीकृति पत्र भी उसे पहले ही जारी कर दिया गया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता को ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने और 10 हजार रुपये मुआवजा व हर्जाना देने के आदेश जारी किए। आदेशों का पालन दो महीने के भीतर न होने पर शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च देना होगा।