कई वर्षों में भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि में वृष राशि का चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार सभी प्रमुख तत्वों का एक साथ आना इसे विशेष बना रहा है।
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। गृहस्थ और संन्यासी एक ही दिन जन्माष्टमी मनाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा संयोग करीब 70 वर्षों बाद बन रहा है।
विज्ञापन
सेक्टर-30 के ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार इस वर्ष 4 सितंबर, शुक्रवार को अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में चंद्रमा के साथ हर्षण योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र युक्त शुक्रवार होने से जयंती योग भी बनेगा।
पंडित मिश्र ने बताया कि कई वर्षों में भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि में वृष राशि का चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार सभी प्रमुख तत्वों का एक साथ आना इसे विशेष बना रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि निर्णय सिंधु के अनुसार अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के साथ अष्टमी तिथि होने पर भगवान कृष्ण की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
विष्णु पुराण में भी ऐसे योग की महत्ता बताई गई है। पंडित मिश्र ने गौतमी तंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि जयंती योग में जन्माष्टमी व्रत और उपवास को अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।