सुधार लहर की बैठक में शामिल नेता।
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शिरोमणि अकाली दल के बागी गुट ने शिअद सुधार लहर को भंग कर दिया गया है। सुधार लहर के विरोध के बाद ही अकाल तख्त ने सुखबीर बादल को तनखहिया घोषित किया था। सुधार लहर के नेता गुरप्रताप सिंह वडाला ने बताया कि सोमवार को गुट की एक बैठक बुलाई गई, जिसमें सहमति बनी कि अकाल तख्त साहिब के आदेश का पालन करते हुए सुधार लहर को भंग लिया जाता है। अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर बादल को सजा सुनाते के बाद सुधर लहर को आदेश दिए थे इसे भंग कर सभी पंथ के लिए एकजुट हों। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सुधार लहर का शिअद में विलय हो पाता है या नहीं।
अकाल तख्त साहिब ने सुधार लहर की सभी तरह की राजनीतिक गतिविधियों पर भी रोक लगाने के आदेश दिए थे। शिअद को उथल-पुथल मचाने में सुधार लहर का अहम रोल रहा है। यहां तक कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के चुनाव में भी सुधार लहर ने शिअद प्रत्याशी के खिलाफ बीबी जागीर कौर को चुनाव मैदान में उतार दिया था।
शिअद को मिली संजीवनी, लेकिन साथ लेकर चलना मुश्किल
सुधार लहर के भंग होने से शिअद को संजीवनी जरूर मिल गई है, लेकिन इन नेताओं को साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती है। सुधार लहर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ हमेशा आवाज बुलंद करता रहा है। पिछले कुछ दिनों में शिअद में पैदा हुए राजनीतिक संकट में सुधार लहर की अहम भूमिका है। इस कारण पार्टी में काफी समय तक इस्तीफे का दौर भी जारी रहा, जिसके बाद में सुधार लहर के रूप में शिअद के सामने एक नया गुट खड़ा हो गया था।