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परीक्षा केंद्र में कृपाण को मंजूरी: SGPC ने लगाई याचिका, हाईकोर्ट ने पूछा-आस्था व सुरक्षा में किसे प्राथमिकता?

Thu, 07 Aug 2025 08:01 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाल ही में पंजाब के तरनतारन की सिख युवती को राजस्थान के जयपुर स्थित पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आयोजित राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा (आरजेएस) में शामिल होने से रोक दिया था। क्योंकि सिख युवती ने धार्मिक प्रतीक (ककार)  कड़ा पहना हुआ था। 
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high court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की तरफ से पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है, जिसमें सिख छात्रों को परीक्षा केंद्रों के भीतर कृपाण ले जाने की अनुमति देने की मांग की गई है। इस याचिका पर वीरवार को सुनवाई हुई। एसजीपीसी की दाखिल की गई जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों से पूछा है कि धार्मिक आस्थाओं व राज्य की सुरक्षा के बीच टकराव होने पर सरकार किसे प्राथमिकता देगी।

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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि कृपाण एक घुमावदार खंजर होता है, जिसे सिख अपने साथ रखते हैं। कोर्ट को बताया गया कि यह सिखों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इसका विवरण देने पर मुख्य न्यायाधीश शील नागू पर आधारित खंडपीठ ने पूछा कि परीक्षा हॉल में चाकू ले जाने की क्या आवश्यकता है। साथ ही प्रतिवादियों से पूछा कि क्या इसे ले जाने को परीक्षा नियमों में प्रतिबंधित किया गया है। 

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में राजस्थान में हुई एक घटना का हवाला दिया गया है, जिसका इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर धार्मिक भावनाओं और राज्य की सुरक्षा के बीच टकराव हो रहा है, जो कि प्रबल है। 
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एसजीपीसी ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में ऐसी जनहित याचिकाएं दायर कर रही है। उन्होंने कहा कि सिख कृपाण को अपनी धार्मिक आस्था का अभिन्न अंग मानते हैं। उन्होंने एक घटना का ज़िक्र किया जिसमें राजस्थान में एक परीक्षार्थी को कृपाण ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय गए थे और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों में ये याचिकाएं दायर करने का निर्देश दिया था। एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए ताकि ऐसा बार-बार न हो। उन्होंने कहा कि कृपाण पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई कानून नहीं है।
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