फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर मुखर हैं। पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है और वरिष्ठ कांग्रेसियों में मतभेद खुलकर सामने हैं। मामला हाईकमान तक पहुंचा हुआ है मगर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक इस संदर्भ में रुख साफ नहीं किया जा रहा है। राजनीतिक माहिर मानते हैं कि बगावत के इस रास्ते पर धड़ेबंदी से जूझ रही कांग्रेस के लिए सत्ता की मंजिल बहुत दूर है।
पंजाब विधानसभा में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है और इस बार भी कांग्रेस को ही अभी तक मुख्य प्रतिद्वंदी दल के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान की ओर से चुनावी तैयारियों संबंधी समितियों की सूची जारी होने के बाद पंजाब कांग्रेस में बगावत छिड़ गई। सूची में मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के कार्यकाल को बरकरार रखने और सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाने के बाद से वरिष्ठ कांग्रेसियों में मतभेद शुरू हो गया।
दरअसल, वरिष्ठ कांग्रेसियों के एक धड़े को उम्मीद थी कि नई सूची में वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटा दिया जाएगा। दूसरा, चन्नी गुट को उम्मीद थी कि पिछली बार की तरह इस बार भी चुनाव से पहले हाईकमान सीएम फेस घोषित करेगा मगर प्रभारी भूपेश बघेल ने साफ कर दिया कि अबकी बार पंजाब में राहुल के फेस पर ही चुनाव लड़ा जाएगा, पार्टी जीती तो सीएम बाद में तय होगा।
इसी मसले पर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, सांसद डॉ. अमर सिंह, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, सुखजिंदर खैहरा, विधायक राणा गुरजीत, पूर्व मंत्री भरत भूषण आशु, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला समेत वड़िंग गुट के नेताओं के बीच मतभेद बढ़ता गया। इसी गुटबाजी की तीन रिपोर्टें राहुल गांधी के टेबल पर है और इस पर अब हाईकमान के स्पष्ट रुख का इंतजार हो रहा है।
साल 2022 के चुनाव से पहले भी पंजाब कांग्रेस में पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच नेतृत्व संघर्ष खुलकर सामने आया था। सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह काे बदलने और लगातार अंदरूनी खींचतान से संगठन कमजोर हुआ था। नतीजतन सूबे में कांग्रेस 77 सीटों से 18 पर सिमट गई थी।