मेकअप पर होने वाला खर्च बढ़ा
संवाद थिएटर ग्रुप के हेड मुकेश शर्मा के मुताबिक समय के साथ रामलीला में मेकअप पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है। पहले सीमित सामान से ही सभी किरदारों को तैयार कर लिया जाता था। कलाकारों को अलग से मेकअप आर्टिस्ट की जरूरत नहीं पड़ती थी। वे एक-दूसरे के चेहरे पर मेकअप लगाकर मंच पर उतरने के लिए तैयार हो जाते थे। अब किरदारों को ज्यादा प्रभावशाली बनाने की मांग के साथ मेकअप के सामान और तैयारियों का दायरा भी बढ़ गया है।
10 साल में डेढ़ हजार से बढ़कर 30-40 हजार रुपये हुआ खर्च
मुकेश शर्मा के अनुसार करीब 10 साल पहले रामलीला के मेकअप के लिए एक से डेढ़ हजार रुपये में सामान आ जाता था। अब इस पर 30 से 40 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। पहले जहां सिंदूर, काजल, लिपस्टिक और फाउंडेशन से काम चल जाता था, वहीं अब मेकअप के लिए कई तरह के उत्पाद इस्तेमाल किए जाते हैं। कलाकारों को तैयार करने के लिए अलग से मेकअप आर्टिस्ट भी बुक किए जाते हैं। इससे रामलीला की तैयारी में मेकअप की अहमियत बढ़ गई है। अब आयोजन की तैयारियां केवल पोशाक और मंच सजाने तक सीमित नहीं हैं।
ग्लिटर-स्पार्कल की चमक कम, नेचुरल लुक की मांग बढ़ी
मेकअप आर्टिस्ट सचिन राजपूत बताते हैं कि पहले रामलीला के किरदारों को आकर्षक बनाने के लिए ग्लिटर और स्पार्कल का काफी इस्तेमाल किया जाता था। चेहरे पर चमकदार रंग और गहरा मेकअप दूर बैठे दर्शकों का ध्यान खींचने का तरीका था। अब यह चलन बदल रहा है। हल्के बेस के साथ किरदार के अनुरूप नेचुरल लुक तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सचिन राजपूत पहले खुद रामलीला में किरदार निभाते थे। ऐसे में उन्हें मंच पर मेकअप के प्रभाव और कलाकारों की मुश्किलों का अनुभव है। उनके अनुसार लोग अब अपनी त्वचा को लेकर पहले से ज्यादा सजग हैं। यही वजह है कि ब्रांडेड मेकअप उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कलाकार भी चाहते हैं कि उनका किरदार प्रभावशाली दिखे, लेकिन त्वचा पर अनावश्यक बोझ न पड़े।