पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं को बैठक में बुलाया ही नहीं गया था। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के पंजाब पहुंचने पर पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं से अलग-अलग बातचीत हो सकती है।
पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के बीच पार्टी हाईकमान ने अब राहुल गांधी के पंजाब दौरे के जरिये नेताओं को एकजुट करने की कवायद तेज कर दी है। गुरुवार को नई दिल्ली के अशोका होटल में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा मौजूद रहे।
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बैठक में राहुल गांधी की पंजाब में प्रस्तावित बस यात्रा के रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया। प्रस्ताव राहुल गांधी की टीम को भेज दिया गया है। इस दौरान राहुल गांधी से 10 सितंबर के बाद पंजाब दौरे के लिए समय देने का आग्रह किया गया है। बैठक में चर्चा की गई कि राहुल गांधी पंजाब में बस के जरिये पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जाएंगे।
इसके लिए दिल्ली में तैयार खड़ी कांग्रेस की प्रचार बस को ही पंजाब लाने की तैयारी है। कांग्रेस की कोशिश है कि बस यात्रा के दौरान पंजाब के सभी प्रमुख नेता राहुल गांधी के साथ नजर आएं ताकि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुट तस्वीर कार्यकर्ताओं और जनता के सामने रखी जा सके। खास बात यह रही कि बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह मौजूद नहीं थे।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं को बैठक में बुलाया ही नहीं गया था। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के पंजाब पहुंचने पर पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं से अलग-अलग बातचीत हो सकती है। पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में चल रहे मतभेदों पर इस बैठक में कोई ठोस या निर्णायक चर्चा नहीं हुई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही खींचतान और बगावत से संबंधित अलग-अलग रिपोर्टें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक पहुंच चुकी हैं।
फिलहाल हाईकमान ने नेतृत्व में बदलाव को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। इससे पहले भी पार्टी प्रभारी बघेल की ओर से संकेत दिए जा चुके हैं कि पंजाब संगठन में बदलाव के बजाय विस्तार पर जोर दिया जाएगा।