अब फरवरी 2025 में वह पाकिस्तान ले गए। बकौल, सतिंदरपाल सिंह लाहौर से तीन घंटे का सफर करके वहां के पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों की मदद से वह चचेरे भाई संतोख सिंह के बताए चक्क 151 (गांव कैरों) पहुंचे और गांव में बड़े बोहड़ के सामने वाला घर की निशानी बताई।
बेटी रमन और दामाद कुलदीप की छलक पड़ीं आंखें
यह गांव इस समय लहंदे पंजाब के जिला टोबा टेक सिंह में आता है। जब वह वहां पहुंचे तो उनके पास एक शख्स गुलाब नबी आया और बोला, असीं तुहाड़े पहले चौकीदार आं...। इतना सुनते ही उनकी, पत्नी बलविंदर कौर, बेटी रमन और दामाद कुलदीप की आंखें छलक पड़ीं। गुलाब नबी ने बताया कि उनके करीब 100 साल के पिता मुख्तयार अहमद आपके चौकीदार हुआ करते थे।
उसने बताया कि यह है उनके दादा वड्डे नंबरदार हरि सिंह का घर। यह सुनते ही उनके मन में घर की एक-एक चीज को छूने और निहारने के लिए मन उत्सुक होने लगा। नम आंखों से पुरखों को याद किया और एक-एक चीज देखकर आंखों से आंसू बह उठे। फिर वह मुख्तयार अहमद से मिलने पहुंचे तो उसने बताया कि नंबरदार हरि सिंह का परिवार भारत में गांव कैरों (अब जिला तरनतारन) में रहता था और बंटवारे से कई साल पहले उन्हें भारत के गांव वडाला जौहलां से यहां ले आए।