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खुशकिस्मती: अमेरिकन बेटी-दामाद ने पाकिस्तान में छूटीं जड़ों से मिलाया, खोजी हवेली; घर को देख नम हो गईं आंखें

Mon, 24 Mar 2025 03:29 PM IST
शाहरुख खान महेश कुमार, संवाद, कपूरथला

सार

Family Reunion In Punjab: अमेरिकन बेटी-दामाद ने पाकिस्तान में छूटीं जड़ों से मिला दिया। सोशल मीडिया की मदद से हवेली खोज निकाली। घर को देख मोहाली के ढिल्लों परिवार की आंखें नम हो गईं। 
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कपूरथला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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चढ़दे-लहंदे पंजाब के असंख्य ऐसे लोग हैं, जिनका बॉर्डर के आर-पार काफी कुछ छूटा है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद जेहन में पुरखों से जुड़ीं यादों को हकीकत बनाने की कसक दोनों पंजाब के लोगों के मन में रह-रह कर उठती रहती हैं। 
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कुछ आ-जा पाते हैं, तो कुछ जटिल वीजा प्रक्रिया के चलते मन मसोस कर रह जाते हैं। इस मामले में चढ़दे पंजाब यानी भारतीय पंजाब के मोहाली निवासी 77 वर्षीय सतिंदरपाल सिंह ढिल्लों और उनकी 72 वर्षीय पत्नी बलविंदर कौर खुशकिस्मत हैं, जो अपनी अमेरिकन बेटी रमनदीप कौर और दामाद कुलदीप धालीवाल की बदौलत लहंदे पंजाब यानी पाकिस्तानी पंजाब में अपने पुरखों की जड़ों को सजदा कर पाए हैं। 

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सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि सतिंदर ढिल्लों को उनके 90 वर्षीय चचेरे भाई संतोख सिंह जलालाबाद ने सिर्फ पुराने घर चक्क नं.151 में होने के बारे में बताया था, लेकिन ढिल्लों परिवार को पाकिस्तान के सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों ने गांव तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई।

अमेरिका के कैलिफोर्निया से अमर उजाला से फोन पर खास बातचीत में सतिंदरपाल सिंह ने बताया कि जीते-जी वह अपने पुरखों के घर को बेटी रमनदीप कौर और दामाद कुलदीप धालीवाल की बदौलत देख पाए हैं। उन्होंने बड़े चचेरों भाइयों से दादा नंबरदार हरि सिंह की बातें सुनीं थी, जिससे उनके मन में घर देखने की लालसा उठी। 2010 में उन्होंने बेटी से बात की तो उन्होंने कहा कि जरूर लेकर जाएंगे। 

अब फरवरी 2025 में वह पाकिस्तान ले गए। बकौल, सतिंदरपाल सिंह लाहौर से तीन घंटे का सफर करके वहां के पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों की मदद से वह चचेरे भाई संतोख सिंह के बताए चक्क 151 (गांव कैरों) पहुंचे और गांव में बड़े बोहड़ के सामने वाला घर की निशानी बताई। 

बेटी रमन और दामाद कुलदीप की छलक पड़ीं आंखें
यह गांव इस समय लहंदे पंजाब के जिला टोबा टेक सिंह में आता है। जब वह वहां पहुंचे तो उनके पास एक शख्स गुलाब नबी आया और बोला, असीं तुहाड़े पहले चौकीदार आं...। इतना सुनते ही उनकी, पत्नी बलविंदर कौर, बेटी रमन और दामाद कुलदीप की आंखें छलक पड़ीं। गुलाब नबी ने बताया कि उनके करीब 100 साल के पिता मुख्तयार अहमद आपके चौकीदार हुआ करते थे। 



 

उसने बताया कि यह है उनके दादा वड्डे नंबरदार हरि सिंह का घर। यह सुनते ही उनके मन में घर की एक-एक चीज को छूने और निहारने के लिए मन उत्सुक होने लगा। नम आंखों से पुरखों को याद किया और एक-एक चीज देखकर आंखों से आंसू बह उठे। फिर वह मुख्तयार अहमद से मिलने पहुंचे तो उसने बताया कि नंबरदार हरि सिंह का परिवार भारत में गांव कैरों (अब जिला तरनतारन) में रहता था और बंटवारे से कई साल पहले उन्हें भारत के गांव वडाला जौहलां से यहां ले आए। 



 

हर कोई सेल्फी लेने के लिए दिखा आतुर
इसे सुनकर उन्हें अपने परिवार के बारे में जानने की और इच्छा हुई। उन्होंने बताया कि नंबरदार हरि सिंह उस समय के सबसे अमीर व्यक्ति थे। उनके पास गांव कैरों के अलावा आसपास करीब छह मरब्बे जमीन थी, जहां पर वह खेती करते थे। कुलदीप धालीवाल व रमनदीप कौर ने बताया कि उन्हें अपने पाकिस्तान घर को देखकर जो खुशी मिली है, उसे लफ्जों में बयां नहीं कर पा रहे हैं। रमनदीप ने बताया कि लोगों ने उन्हें गांव की बेटी होने के नाते सूट उपहार रूप में दिया। हर कोई हमसे सेल्फी लेने को आतुर नजर आ रहा था। गांव के लोगों ने उन्हें पलकों पर बिठाया।

वहां पर भी है फिल्लौर
कुलदीप धालीवाल ने बताया कि लहंदे पंजाब में भी फिल्लौर है, जोकि गांव कैरों से महज तीन किलोमीटर की दूरी है। उन्हाेंने बताया कि नंबरदार हरि सिंह उस समय के सरमायेदार परिवार से संबंधित थे। उनकी रसाला रेलवे स्टेशन के पास भी जमीन थी।

 
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पाकिस्तान के गुरु घरों में माथा टेका
कुलदीप धालीवाल व रमनदीप कौर ने बताया कि उन लोगों ने परिवार के साथ गुरुद्वारा ननकाना साहिब, गुरुद्वारा पंजाब साहिब सहित तमाम गुरु घरों के दर्शन किए। महाराजा रणजीत सिंह की हवेली भी देखी।
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