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Punjab: MP राजेंद्र गुप्ता सुरक्षा वापसी पर पहुंचे हाईकोर्ट, संदीप पाठक ने खुद पर दर्ज FIR का ब्योरा मांगा

Fri, 08 May 2026 08:48 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राजेंद्र गुप्ता ने दलील दी है कि राजनीतिक विचारधारा बदलने से सुरक्षा जोखिम खत्म नहीं होते इसलिए सरकार को निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए थी। उन्होंने सुरक्षा बहाल करने और वापसी के आदेश रद्द करने की मांग की है।
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संदीप पाठक और राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए ट्राइडेंट लिमिटेड के चेयरमैन और राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता की सुरक्षा वापस लेने का मामला अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। उन्होंने पंजाब सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
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याचिका में कहा गया है कि उन्हें पहले खतरे के आकलन के आधार पर पंजाब पुलिस की सुरक्षा दी गई थी जो किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए थी। आरोप है कि राजनीतिक दल बदलने के बाद सरकार ने बदनीयती और राजनीतिक दुर्भावना के चलते उनकी सुरक्षा हटा दी।

गुप्ता ने दलील दी है कि राजनीतिक विचारधारा बदलने से सुरक्षा जोखिम खत्म नहीं होते इसलिए सरकार को निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए थी। उन्होंने सुरक्षा बहाल करने और वापसी के आदेश रद्द करने की मांग की है। सुरक्षा जैसे गंभीर मामले में राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर फैसला लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के खिलाफ है।
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मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस करेंगे। इससे पहले भी सुरक्षा वापसी को लेकर कुछ अन्य नेताओं द्वारा अदालत का रुख किया जा चुका है, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

भाजपा नेता संदीप पाठक हाईकोर्ट पहुंचे

आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए संदीप पाठक ने अपने खिलाफ पंजाब में दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने याचिका दाखिल कर पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस से अपने खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को चीफ जस्टिस करेंगे।

याचिका में संदीप पाठक ने कहा है कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि उनके खिलाफ पंजाब में दो एफआईआर दर्ज हैं लेकिन अब तक न तो किसी एफआईआर की प्रति दी गई और न ही आधिकारिक तौर पर मामलों की संख्या बताई गई है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि उन्हें यह जानकारी दी जाए कि किन थानों में, किस तारीख को और किन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हैं। यदि इसके अलावा कोई अन्य मामला है तो उसका भी पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा है कि यदि पुलिस किसी मामले में कठोर कार्रवाई करना चाहती है तो उन्हें पहले पर्याप्त समय और अवसर दिया जाए ताकि वे अपना बचाव कर सकें। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक दल बदलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई में राजनीतिक प्रतिशोध की भावना दिखाई दे रही है और राज्य मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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