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गुरदासपुर एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त: हर मुठभेड़ की कहानी एक जैसी, आंखें कैसे मूंद लें; जांच स्टेटस रिपोर्ट तलब

Thu, 05 Mar 2026 02:57 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

22 फरवरी को गुरदासपुर में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास आदियां गांव की पुलिस चेक पोस्ट पर एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड कांस्टेबल अशोक कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गांव के ही रणजीत सिंह को एनकाउंटर में मार दिया गया था।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुरदासपुर में 19 वर्षीय युवक रणजीत सिंह की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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अदालत ने कहा कि लगभग हर मुठभेड़ में एक जैसा तरीका सामने आता है और इसे अनदेखा करते हुए अदालत आंखें नहीं मूंद सकती। हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्टेटस रिपोर्ट तलब करते हुए पंजाब के डीजीपी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

यह सुनवाई लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस हिरासत में दिए गए टीवी इंटरव्यू और गुरदासपुर एनकाउंटर से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले के दौरान हुई। सुनवाई में डीजीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत को बताया गया कि इस मुठभेड़ मामले का संज्ञान न्यायिक मजिस्ट्रेट पहले ही ले चुके हैं।

हथियार बरामदगी के दौरान भागने की कोशिश का दावा

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 21 और 22 फरवरी की रात दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में रणजीत सिंह को 24 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। आधी रात को उसे हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाया गया, जहां उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।

बिना आपराधिक रिकॉर्ड के युवक की मौत पर सवाल

अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने बताया कि रणजीत सिंह की उम्र महज 19 वर्ष थी और उसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि आरोपी पुलिस हिरासत में था तो उसके भागने की स्थिति कैसे बनी और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। सरकार ने बताया कि आरोपी के भागने की कोशिश को लेकर अलग से एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, डीजीपी ने अदालत को अवगत कराया कि पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

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सुखपाल खैरा ने की सीबीआई जांच की मांग

कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा ने कहा कि मैं पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा रणजीत सिंह की एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग पर खुद संज्ञान लेने का स्वागत करता हूं, जिन्होंने आज ही डीजीपी को तलब किया है। यह पिछले कुछ महीनों में भगवंत मान सरकार के तहत पुलिस द्वारा बनाई गई 42वीं फेक एनकाउंटर की कहानी है। हम अपील करते हैं कि हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई द्वारा समय पर जांच हो ताकि सच्चाई सामने आए और उन सभी दोषी पुलिस अधिकारियों और ताकतवर नेताओं को सज़ा मिले जो लोगों को बेरहमी से मारने के ऐसे गैर-कानूनी आदेश देने में शामिल थे।
 
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