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हाईकोर्ट की बिल्डिंग का होगा विस्तार: बढ़ते कामकाज को लेकर लिया फैसला, क्या बोले न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार?

Mon, 17 Aug 2026 08:12 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 85 है लेकिन फिलहाल केवल 69 अदालत कक्ष ही काम कर रहे हैं। ऐसे में सभी स्वीकृत न्यायाधीशों के पूरी क्षमता से काम करने में आधारभूत सुविधाओं की कमी बाधा बन रही है
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बढ़ते कामकाज और लगातार बढ़ रही आधारभूत सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए परिसर के विस्तार की बड़ी योजना तैयार की गई है। इसके तहत हाईकोर्ट भवन में करीब 10 लाख वर्गफीट अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ने की योजना है। इतनी ही जगह पार्किंग के लिए उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। विस्तार के दौरान चंडीगढ़ की वास्तुकला, पर्यावरणीय स्वरूप और विरासत की पहचान को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में कहा कि हाईकोर्ट की मौजूदा इमारत उस समय की जरूरतों के अनुसार तैयार की गई थी, जब न्यायाधीशों और अदालत कक्षों की संख्या काफी कम थी। समय के साथ अदालत का कामकाज और संस्थागत जरूरतें कई गुना बढ़ गई हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समग्र विकास योजना तैयार की गई है।

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85 न्यायाधीशों के लिए 69 कोर्ट रूम
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 85 है लेकिन फिलहाल केवल 69 अदालत कक्ष ही काम कर रहे हैं। ऐसे में सभी स्वीकृत न्यायाधीशों के पूरी क्षमता से काम करने में आधारभूत सुविधाओं की कमी बाधा बन रही है। जुलाई 2020 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल गई थी लेकिन विरासत संबंधी आपत्तियों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

विरासत संरक्षण के चलते बदली गई योजना
मुकदमों की संख्या और न्यायाधीशों की जरूरत लगातार बढ़ने के बाद संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ की सिफारिश पर परियोजना में बदलाव किया गया। इसे घटाकर भूतल और पहली मंजिल तक सीमित करने तथा करीब 2.66 लाख वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण का सुझाव दिया गया।

वास्तु पहचान से समझौता नहीं
हाईकोर्ट भवन चंडीगढ़ की विशिष्ट वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शहर की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली हुई है। ऐसे में प्रस्तावित विस्तार में भवन की मूल वास्तु पहचान और पर्यावरणीय स्वरूप से समझौता नहीं करने की बात कही गई है। योजना का उद्देश्य विरासत संरक्षण और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है। करीब 10 लाख वर्गफीट अतिरिक्त निर्माण और लगभग इतनी ही पार्किंग व्यवस्था से अदालत कक्षों, रजिस्ट्री शाखाओं, कार्यालयों, वकीलों और आम लोगों के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।
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