रोपड़ हेडवर्क्स पर खाली पड़ी बिल्डिंग में इरिगेशन म्यूजियम बनाया जाएगा। इसमें नहरों और बांधों के मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके इलावा एग्रीमेंट और दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे।
पंजाब विधानसभा के सोमवार के सत्र में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। उनकी जयंती के अवसर पर आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया था।
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हालांकि शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत रत्न देने का प्रस्ताव स्वीकार न किए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रस्ताव पेश करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कांशीराम ने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। इसलिए केंद्र सरकार को उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर चुके हैं। इसी दौरान बाजवा ने स्पीकर के समक्ष शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत रत्न देने के लिए अलग प्रस्ताव रखने की मांग की।
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स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल कांशीराम से संबंधित प्रस्ताव पर ही चर्चा होगी। इसके बाद सदन में इस पर चर्चा हुई और विभिन्न विधायकों ने कांशीराम के योगदान का उल्लेख किया। अंत में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अब पंजाब सरकार इस संबंध में केंद्र सरकार को सिफारिश भेजेगी।
प्रस्ताव पर विवाद, कांग्रेस ने किया वॉकआउट
कांशीराम का प्रस्ताव पारित होते ही प्रताप सिंह बाजवा ने भगत सिंह को भारत रत्न देने का प्रस्ताव फिर से उठाया। इसी दौरान आप विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर ने बाजवा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव रख दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे और बाद में सदन से वॉकआउट कर गए। सदन से बाहर भी कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बाजवा ने कहा कि भगत सिंह के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता और दोनों प्रस्ताव एक साथ पारित किए जा सकते थे।
विधानसभा ने सोमवार को दो अहम विधेयकों को मंजूरी दे दी। इनमें पंजाब रेगुलेशन ऑफ क्रशर यूनिट्स एंड स्टॉकिस्ट्स एंड रिटेलर्स (संशोधन) बिल-2026 और श्री गुरु तेग बहादुर वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी पंजाब बिल-2026 शामिल हैं। नए बिल के तहत आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने बताया कि विश्वविद्यालय में रक्षा प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर वारफेयर और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे कोर्स उत्तर भारत के किसी भी विश्वविद्यालय में उपलब्ध नहीं हैं और इस संस्थान को एमआईटी जैसे वैश्विक संस्थानों के स्तर का बनाया जाएगा।
प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में रक्षा प्रौद्योगिकी में बीएससी, रणनीतिक व रक्षा अध्ययन में एमएससी, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स व राडार प्रणालियों में एमटेक, मिलिट्री रोबोटिक्स और परमाणु प्रणालियों में एमटेक शामिल हैं। इसके अलावा एआई में बीटेक व एमटेक, डेटा साइंस में एमएससी, ड्रोन इंजीनियरिंग व यूएवी टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा में बीटेक, साइबर वारफेयर व राष्ट्रीय सुरक्षा में एमटेक, स्पेस टेक्नोलॉजी व सैटेलाइट इंजीनियरिंग में बीटेक, सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग में बीटेक और चिप डिजाइन व माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स में एमटेक जैसे कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।
साथ ही क्वांटम टेक्नोलॉजी व क्वांटम कंप्यूटिंग, मिलिट्री हिस्ट्री में बीए व एमए, रक्षा व सैन्य कानून में एलएलएम तथा सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अध्ययन में पीजी डिप्लोमा भी करवाए जाएंगे।
तीन साल में 300 करोड़ का निवेश, जुलाई 2026 से पढ़ाई की तैयारी
बैंस ने कहा कि महिंद्रा, टाटा और अन्य कंपनियां ड्रोन और मिसाइल निर्माण में सक्रिय हैं, इसलिए युवाओं को नई तकनीकों और चुनौतियों के लिए प्रशिक्षित करना जरूरी है। सतलुज नदी और गोबिंद सागर झील के संदर्भ में समुद्री अध्ययन से जुड़े कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा गुरु काल से लेकर महाराजा रणजीत सिंह के समय तक की युद्ध परंपराओं के अध्ययन के लिए सैन्य इतिहास में मास्टर डिग्री भी दी जाएगी।
विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तीन वर्षों में करीब 300 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव है। मौजूदा बजट में शुरुआती तौर पर 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसे कीरतपुर साहिब-नंगल हाईवे पर प्रस्तावित नए बाईपास के पास स्थापित किया जाएगा।
बैंस ने बताया कि जुलाई 2026 से पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए एक बंद पड़े कॉलेज और एक मार्शल अकादमी को अस्थायी ट्रांजिट कैंपस के रूप में चिन्हित किया गया है। विश्वविद्यालय में भविष्य में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाएगी। इस दौरान कांग्रेस विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने 2021 में तरनतारन लॉ यूनिवर्सिटी के प्रति कथित बेरुखी का मुद्दा भी उठाया।
खनन नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने के लिए संशोधन
विधानसभा ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ क्रशर यूनिट्स एंड स्टॉकिस्ट्स एंड रिटेलर्स (संशोधन) बिल-2026 भी पारित किया। इसके तहत क्रशर यूनिटों का अनिवार्य पंजीकरण, मासिक संचालन रिटर्न जमा करना और बिजली खपत के आधार पर उत्पादन की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। छोटे खनिजों से जुड़े लेन-देन की डिजिटल ट्रैकिंग भी शुरू होगी, जिससे अवैध खनन पर रोक लगेगी और राजस्व में वृद्धि होगी।
सत्र के दौरान सदन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की विभिन्न रिपोर्टों समेत कुल 11 रिपोर्टें भी प्रस्तुत की गईं। इनमें राज्य के वित्त, राजस्व, सार्वजनिक उपक्रमों, स्थानीय निकायों, ठोस कचरा प्रबंधन तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के प्रदर्शन से संबंधित रिपोर्टें शामिल हैं। इसके अलावा वित्त खाते, विनियोजन खाते और बुद्धा दरिया व घग्गर दरिया से जुड़ी समिति की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी गई।