पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी की सरकार ने 82 विधायकों के साथ अपनी ताकत दिखाते हुए विश्वास प्रस्ताव पारित करवाया।
आप सरकार ये प्रस्ताव सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद अपनी एकजुटता दिखाने के मकसद से लाई थी। इस विश्वास प्रस्ताव की प्रति 05 मई को सीएम मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति को सौंपेंगे।
15 फीसदी न्यूनतम मजदूरी बढ़ी
इसके अलावा सदन में मजदूरों को मई दिवस पर बड़ा तोहफा देते हुए सीएम भगवंत सिंह मान ने 15 प्रतिशत न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की भी घोषणा की। पंजाब में ये बढ़ोतरी साल 2013 के बाद हुई है।
इस दौरान सदन में विपक्ष ने खूब हंगामा भी किया जिसका विरोध करते हुए आप के विधायकों ने भी सदन में जमकर नारेबाजी की। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने सदन में हंगामे के दौरान लगाए गए सभी नारों और आपत्तिजनक आरोपों को सदन की कार्रवाई से हटाने के निर्देश दिए। हंगामे के बाद कांग्रेसी विधायकों ने सदन का बहिष्कार कर दिया जबकि शिरोमणि अकाली दल व भाजपा के विधायक पहले ही सदन से गैरहाजिर थे।
मई दिवस पर मजदूरों के सम्मान के लिए पंजाब सरकार ने विधानसभा का विशेष सदन बुलाया था। इस दौरान मनरेगा के संशोधन बिल पर सीएम समेत आप के अन्य मंत्रियों ने केंद्र सरकार को घेरा तो वहीं इस बात पर चिंता जताई कि साल 2013 से लेकर 2022 तक शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस की सरकार ने पंजाब में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के बारे क्यों नहीं सोचा।
सीएम ने कहा, हमारी सरकार भी इस मामले में भले ही थोड़ा लेट हो गई है मगर शुक्रवार को मजदूर दिवस पर न्यूनतम मजदूरी में 15 फीसदी इजाफे का एलान कर आप सरकार ने मजदूरों का उनका हक दे दिया है। मंत्री लालचंद कटारूचक ने मजदूर दिवस की महत्ता बताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में मजदूरों की मेहनत को सदन की ओर से नमन किया।
दो विधेयकों को मिली मंजूरी
सदन में दो विधेयकों पंजाब प्रिजन एंड करेक्शन सर्विसेस बिल-2026 व सोसाइटी रजिस्ट्रेशन पंजाब संशोधन बिल-2026 को भी बहस के बाद मंजूरी दी गई। सदन ने श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ पारित किए गए श्री जागत जोत श्री गुरुग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 के लागू होने पर भी धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। दूसरी ओर, चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा ने सदन से अलग अपना समांतर मॉक सत्र आयोजित किया, जिसमें पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए आप सरकार को घेरा।
सदन में दो बार हंगामा, तीन बार तीखी बहस
सदन की शुरुआत में ही सीएम भगवंत मान ने कांग्रेसी विधायकों से आग्रह किया कि आज मजदूरों को समर्पित यह विशेष सत्र बुलाया गया है लिहाजा सभी सदन में मौजूद रहें और बहिष्कार से परे इस मसले पर चर्चा करें। इसी दौरान कांग्रेसी विधायक सुखपाल खेहरा को भी सीएम ने मोबाइल से ध्यान हटाकर स्पीकर की बात ध्यान से सुनने को कह दिया। बस, इसी बात पर खेहरा ने सीएम पर आपत्तिजनक आरोप मढ़ दिया। सीएम इस पर खासे नाराज हो गए और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हुई। तभी नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा सभी कांग्रेसी विधायकों को लेकर वेल में पहुंच गए और सभी सदस्यों की एल्कोमीटर जांच करवाने की मांग करने लगे। स्पीकर ने जब मांग खारिज की तो कांग्रेसी सदन से बाहर चले गए। लंच के बाद कांग्रेसी फिर सदन में पहुंचे और स्पीकर के समक्ष अपनी मांग दोहराने लगे। पहले तो दो बार तीखी बहस हुई ओर फिर नारेबाजी के साथ सदन में हंगामा शुरू हो गया, इस बार कांग्रेसियों के विरोध में आप के विधायकों ने भी वेल में पहुंचकर खूब हंगामा किया। अंतत: कांग्रेसी फिर सदन का बहिष्कार कर चले गए।
आप के सिपाही ईडी से डरने वाली नहीं
राज्यसभा के सात सांसदों द्वारा भाजपा में शामिल होने के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में मंत्रिमंडल में विश्वास प्रस्ताव रखा। इसका मकसद विरोधियों को आप विधायकों की एकजुटता व ताकत दिखाना था। कुल 117 विधायकों में से आप के 95 विधायक हैं। जिनमें से 82 विधायक सदन में मौजूद रहे। दो विधायक जेल में हैं, एक निलंबित है और अन्य विधायक पार्टी को अपनी वजह बताकर सदन से गैरहाजिर थे। सीएम ने विश्वास प्रस्ताव रखते हुए भाजपा को चेताते हुए कहा कि आप का हर नेता केजरीवाल का सिपाही है और वे न ईडी से डरते हैं और न अन्य जांच एजेंसियों से। हमारे पास पर्याप्त आंकड़ा, बहुमत पक्का है और सरकार अटल है। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा, कई दिनों से अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि आप के विधायक अन्य दलों के संपर्क में हैं लिहाजा सभी विरोधी दल आज उनकी ताकत देख लें। इसके बाद सभी विधायकों ने एकजुटता के साथ मेज थपथपाते हुए इस विश्वास प्रस्ताव को पारित किया।
विधानसभा में हंगामा, वेल में विधायकों की नारेबाजी
पंजाब विधानसभा में मंत्रियों और पक्ष-विपक्ष के सभी विधायकों का एल्कोमीटर टेस्ट करवाने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस और आप के विधायकों ने वेल में आकर एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया जिसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायकों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर मांग की कि सभी विधायकों का एल्कोमीटर और डोप टेस्ट करवाया जाना चाहिए। इसके बाद विधानसभा में हंगामा शुरू हो गया और कांग्रेस व आप विधायकों में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान खैरा विधानसभा में ताला लेकर भी पहुंच गए।
बाजवा ने सदन में भी मांग की कि दरवाजे बंद करके सभी सभी टेस्ट करवाया जाना चाहिए। स्पीकर ने कहा कि सदन के किसी सदस्य की शान में कोई बात बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई विधायक ऐसा करेगा तो उसको नेम कर दिया जाएगा इसलिए विपक्ष की इस मांग को खारिज किया जाता है। हंगामे के बीच सदन को दो बार स्थगित भी करना पड़ा बावजूद इसके हंगामा जारी रहा।