आम आदमी पार्टी को लगे सियासी झटके के बीच पंजाब में सियासी हड़कंप मचा हुआ है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें पंजाब के सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और दिल्ली की सांसद स्वाति मालीवाल शामिल हैं।
इतने सांसदों को एक साथ आप से इस्तीफा देने के बाद पंजाब में सियासत गरमा गई। खुद सीएम ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस मामले में पार्टी का पक्ष रखा।
राघव और स्वाति थे केजरीवाल से नाराज
पार्टी में बड़ी टूट के बाद इन सांसदों के भाजपा में जाने के कारणों पर सवाल उठने लगे। राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल तो पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से नाराज थे। वहीं अशोक मित्तल पर दस दिन पहले ईडी की रेड पड़ी थी। आप ने दावा किया कि भाजपा ने ईडी का प्रयोग कर मित्तल को डराया। समर्थकों को सबसे बड़ा सरप्राइज संदीप पाठक के नाम पर मिला।
जीत दिलाने के बाद भी पंजाब से किया दूर
सियासी जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों को भी सबसे ज्यादा हैरानी संदीप पाठक के नाम पर हुई। संदीप पाठक केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब केजरीवाल जेल में थे तो उनसे मिलने की अनुमति तीन लोगों को थी, जिनमें एक संदीप पाठक थे। उन्होंने पंजाब चुनाव में अपनी रणनीति से ही पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। पंजाब चुनाव के बाद वे एक तरह से पार्टी के चाणक्य बनकर उभरे थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा की सीट दी।
हालांकि इसके बाद उन्हें पंजाब के पार्टी प्रभारी पद से हटाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया गया। उनके स्थान पर मनीष सिसोदिया को पंजाब का चुनाव प्रभारी लगाया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बात से पाठक काफी नाराज थे। इसके अलावा 2025 में दिल्ली चुनाव में हार के बाद भी पाठक पर पार्टी के अंदर सवाल उठने लगे थे।
आप नेता भी हैरान
आप नेता भी पाठक के इस फैसले से हैरान दिखे। आप नेता सोमनाथ भारती ने ट्वीट किया-संदीप पाठक भाई, आप क्यों?? पूरे पार्टी में किसी के भी गले से नहीं उतर रहा है कि आप उस भाजपा में जाओगे जिसे आप देश के लिए खतरनाक मानते थे! राघव के पीछे पीछे आप?? आपकी क्या मजबूरी रही?? मूल्यों का क्या हुआ?? अरविंद केतरीवाल के साथ जीने मरने की कसम खाने वाले प्रो संदीप पाठक का क्या हुआ?
पीएचडी हैं पाठक
छत्तीसगढ़ के रहने वाले संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की हुई है। संदीप पाठक ने आईआईटी दिल्ली की नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा था।