याचिकाकर्ता महिला ने अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उसे गिरफ्तारी के आधार पंजाबी भाषा में दिए गए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
गिरफ्तारी के आधार पंजाबी भाषा में दिए जाने मात्र से गिरफ्तारी अवैध नहीं हो जाती। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली अमृतसर निवासी महिला की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जब संबंधित व्यक्ति ने गिरफ्तारी के समय भाषा को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो केवल पंजाबी में गिरफ्तारी के आधार दिए जाने को संविधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
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याचिकाकर्ता महिला ने अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उसे गिरफ्तारी के आधार पंजाबी भाषा में दिए गए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन हुआ। उसका तर्क था कि इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।
गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना जरूरी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 22 गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने का अधिकार सुनिश्चित करता है, ताकि वह अपनी कानूनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा सके। अदालत ने मामले में भाषा को लेकर तत्काल आपत्ति नहीं जताए जाने के पहलू को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने महिला की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि गिरफ्तारी के आधार पंजाबी भाषा में दिए जाने के कारण ही गिरफ्तारी को गैरकानूनी या असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी गई।