अदालत ने जोड़े को संबंधित थाना प्रभारी के समक्ष हर 15 दिन में पेश होने का आदेश दिया है। उन्हें मोबाइल नंबर चालू रखने और वर्तमान पता थाना प्रभारी को उपलब्ध कराना होगा। अदालत ने कहा कि महिला अभी अपने साथी की पृष्ठभूमि से पूरी तरह परिचित नहीं है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जीवन और स्वतंत्रता को खतरा बताकर सुरक्षा मांगने वाले लिव-इन जोड़े को सुरक्षा दी है। न्यायमूर्ति आलोक जैन ने उनकी नियमित निगरानी का निर्देश दिया। यह व्यवस्था कम से कम तीन महीने तक जारी रहेगी।
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अदालत ने जोड़े को संबंधित थाना प्रभारी के समक्ष हर 15 दिन में पेश होने का आदेश दिया है। उन्हें मोबाइल नंबर चालू रखने और वर्तमान पता थाना प्रभारी को उपलब्ध कराना होगा। अदालत ने कहा कि महिला अभी अपने साथी की पृष्ठभूमि से पूरी तरह परिचित नहीं है। इससे पहले 11 सितंबर को पारित आदेश के बाद दोनों अदालत के समक्ष पेश हुए थे। न्यायमूर्ति आलोक जैन ने उनसे बातचीत कर उनकी स्थिति को समझने का प्रयास किया। जोड़े की कम उम्र को ध्यान में रखते हुए महिला को माता-पिता से प्रतिदिन बात करने को कहा गया। उसे अपनी कुशलक्षेम की जानकारी उन्हें देनी होगी। माता-पिता को आशंका होने पर वे तत्काल थाना प्रभारी को सूचना दे सकेंगे।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि जोड़े ने 25 अगस्त को सुरक्षा के लिए अभ्यावेदन दिया था। पुलिस ने इस अभ्यावेदन की जांच की और महिला के माता-पिता के बयान भी दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, जांच में कोई खतरा सामने नहीं आया। इसके बावजूद, अदालत ने जोड़े की कम उम्र और परिस्थितियों के कारण एहतियाती निगरानी का आदेश दिया।