केंद्र सरकार की तरफ से नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत 130 शहरों में प्रदूषण कम करने का प्रयास किया जा रहा है। पंजाब के आठ शहरों में भी इस योजना के तहत काम चल रहा है, लेकिन प्रदेश के कई शहर अभी भी प्रदूषण कम करने में पीछे हैं।
डेराबस्सी में तो प्रदूषण कम होने की जगह उल्टा बढ़ गया है, जबकि लुधियाना सिर्फ 4 प्रतिशत, पटियाला 14 प्रतिशत और मंडी गोबिंदगढ़ सिर्फ 15 प्रतिशत प्रदूषण कम कर पाया है। वहीं, केंद्र सरकार ने 40 प्रतिशत प्रदूषण कम करने का लक्ष्य तय किया था। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। संसद में एक सवाल के जवाब में यह रिपोर्ट पेश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार डेराबस्सी में 16 प्रतिशत प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017-18 में यहां प्रदूषण का पीएम10 स्तर 88 था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 102 हो गया है। प्रदेश में जालंधर और अमृतसर प्रदूषण कम करने में सबसे आगे हैं। जालंधर में 38 प्रतिशत और अमृतसर में 37 प्रतिशत प्रदूषण कम हुआ हैं। अमृतसर में वर्ष 2017-18 के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का पीएम10 स्तर 189 था, जो वर्ष 2023-24 में कम होकर 119 हो गया है।
इसी तरह खन्ना में 30 प्रतिशत और डेरा बाबा नानक में 29 प्रतिशत प्रदूषण कम हुआ है। दूसरे शहरों से यह बेहतर है, लेकिन अभी भी काफी काम करने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने सभी शहरों को वर्ष 2017 के मुकाबले 2024 तक वायु प्रदूषण को कम करने का लक्ष्य दिया था। इस टारगेट को बाद में बढ़ाकर वर्ष 2025-26 तक 40 प्रतिशत कर दिया गया था। वायु प्रदूषण कम करने के लिए राज्यों को विशेष फंड जारी किया जा रहा है। इस फंड का उपयोग प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग परियोजनाओं में किया जा रहा है। नगर निकायों की तरफ से सफाई के लिए स्वीपिंग मशीनें खरीदी जाती हैं और वन विभाग की तरफ से ग्रीनरी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
130 में से 97 शहरों में हुआ सुधार
रिपोर्ट के अनुसार 130 शहरों में से 97 में प्रदूषण कम करने में सुधार हुआ है। जिन शहरों में अभी तक प्रदूषण कम नहीं हुआ है, उनमें केंद्र की तरफ से अब विशेष फोकस किया जाएगा। केंद्र ने पंजाब के इन 9 शहरों को प्रदूषण अधिक होने के चलते गैर प्राप्ति शहरों की सूची में शामिल किया था। गैर-प्राप्ति उन शहरों को घोषित किया जाता है, जो 5 साल की अवधि में लगातार वायु गुणवत्ता स्तर पीएम-10 के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक को पूरा नहीं करते हैं। वायु प्रदूषण के पीएम10 स्तर में 10 माइक्रोमीटर व्यास वाले मोटे कण होते हैं, जो सांस के मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है।