ऐसे हमलों से खुलते हैं फंडिंग के रास्ते
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि न्यूजीलैंड, कनाडा और अन्य देश में जिस प्रकार से भारत के खिलाफ खुले तौर पर कुछ खालिस्तानी व आतंकी संगठन प्रदर्शन या मूवमेंट चलाकर अपना विरोध जाहिर करते रहते हैं, इस प्रकार के मूवमेंट को बड़े स्तर पर अंजाम देने के लिए और भारत में भी इसका असर बना रहा, इसके लिए फंडिंग की जरूरत पड़ती है। तमाम संगठनों व देशों से खालिस्तानी संगठनों को फंडिंग होती रहे, इसके लिए भी कई बार ऐसे हमले कराए जाते हैं। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। अधिकारी ने बताया कि थानों पर ग्रेनेड हमलों की आड़ में किसी बड़ी घटना को भी अंजाम देना मकसद हो सकता है।
पंजाब में स्लीपर सेल्स एक्टिव किए जा रहे-पूर्व डीजीपी शशि कांत
पंजाब कैडर के 1977 बैच के पूर्व आईपीएस एवं पंजाब के पूर्व डीजीपी शशि कांत बताते हैं कि थानों पर जो हैंड ग्रेनेड हमले हुए हैं, उनमें देखने को मिला है कि इन हैंड ग्रेनेड के फटने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। इन विस्फोटकोंं की मार क्षमता अधिक नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पुराने हैंड ग्रेनेड थे और कहीं दबे या किसी जगह पर लंबे समय से पड़े रहे होंगे, जिनका इस्तेमाल कुछ ग्रुप थानों को टारगेट कर डर का माहौल बनाना चाहता हैं। वैसे सही तथ्य तभी पता चल सकते हैं जब इन थानों में हुए ग्रेनेड हमलों या बरामद हुए आईईडी की फॉरेंसिक जांच करा पता लगाया जाए कि यह कब के बने हुए हैं या इनका मॉडल क्या है। बड़ा दावा करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि आतंकवाद का दौर देखा जाए तो इस प्रकार के हमले आतंकी संगठन अपने स्लीपर सेल्स को एक्टिव करने के लिए भी करवाते थे। हो सकता है अपने स्लीपर सेल्स को एक्टिव कर इस प्रकार के हमले के जरिये आने वाले दिनों में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार किया जा रहा हो।