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PM Punjab Visit: दोआबा में चुनावी रणनीति को देंगे धार, पांच महीने में दूसरा दाैरा; कहा-पंजाब आने को उत्सुक हूं

Fri, 17 Jul 2026 09:41 AM IST
Nivedita मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीएम नरेंद्र मोदी जालंधर में रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत करीब 5500 करोड़ रुपये की सौगात पंजाबियों को देंगे। साथ ही वे आगामी चुनाव के लिए चुनावी रणनीति को धार देंगे।
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पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब में दलित राजनीति का गढ़ माने जाने वाले दोआबा क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साढ़े पांच महीने में दूसरा दौरा भाजपा की चुनावी रणनीति को धार देगा। 

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मोदी शाम को जालंधर पहुंचेंगे और यहां रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत करीब 5500 करोड़ रुपये की सौगात पंजाबियों को देंगे। इसी साल एक फरवरी को भी मोदी जालंधर आए थे।

हालांकि मोदी इस दौरान पंजाबियों को सूबे में केंद्र सरकार की ओर से इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश का अहसास तो करवाएंगे, साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने का काम भी करेंगे। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मोदी के निशाने पर होगी जबकि प्रधानमंत्री इस दौरान पंजाबियों के लिए कोई बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं।

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अपने सियासी वजूद को मजबूत करना चाहती है भाजपा

दरअसल, भाजपा पिछले कुछ समय से पंजाब में अपने सियासी वजूद को और मजबूत करने में जुटी है। इसके लिए एकला चलो की नीति के तहत साल 2022 (विधानसभा चुनाव) और 2024 (लोकसभा चुनाव) में भाजपा अकेली ही चुनाव रण में उतरी थी। अब साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही भाजपा एक खास रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है। इसी के चलते दोआबा क्षेत्र में भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस है।

पंजाब के माझा क्षेत्र की बात करें तो यहां भाजपा पठानकोट, अमृतसर इत्यादि शहरी क्षेत्रों में हिंदू वोट बैंक पर अपने खासे प्रभाव का दावा करती है मगर यहां ग्रामीण इलाकों में भाजपा का कैडर कमजोर है। उधर, मालवा क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक स्थिति जटिल और चुनौतीपूर्ण रही है।

हालांकि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू समेत अन्य नेता इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। यहां भाजपा बड़े औद्योगिक शहरों में अपना मजबूत जनाधार मानती है मगर इसी क्षेत्र की किसान जत्थेबंदियों को साधना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
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दोआबा पर ज्यादा फोकस क्यों

दोआबा एक संवेदनशील राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। यहां सबसे बड़ा वोट बैंक करीब 37 प्रतिशत दलितों का है। सतलुज और ब्यास के बीच बसे इस इलाके में जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर) शामिल हैं। यह क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी सूबे का प्रभावशाली क्षेत्रों में गिना जाता है।

23 विधानसभा सीटों वाला यह इलाका सभी सियासी दलों के बड़े फोकस का केंद्र रहता है। चुनाव में इस क्षेत्र में दलित वोटबैंक ही निर्णायक फैक्टर बनता है इसीलिए यहां आठ विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के आरक्षित हैं। यहां एनआरआई परिवार भी काफी ज्यादा हैं। ये एनआरआई अन्य सामाजिक कार्याें के साथ-साथ चुनाव के दाैरान भी अच्छा खासा फंड राजनीतिक दलों को मुहैय्या करवाते हैं।

जातीय समीकरणों का प्रभाव

दोआबा में दलित वोट बैंक के साथ-साथ कई इलाकों में रामदासिया सिख, जाट सिख, खत्री अरोड़ा, ब्राह्मण, राजपूत और ओबीसी समुदाय (सैनी, लुबाना आदि) का भी अच्छा प्रभाव है। इन्हीं जातीय समीकरणों को साधने के लिए सभी दल यहां सक्रिय रहते हैं।

हरियाणा के सीएम नायब सैनी भी पिछले कुछ महीनों से इसी बेल्ट में सक्रियता दिखा रहे हैं जबकि पीएम दोबारा आ रहे हैं। उधर, डेरा सचखंड बल्लां (जालंधर) सहित कई धार्मिक डेरे इस इलाके में हैं जिनका विशेषकर रविदासिया समाज पर प्रभाव माना जाता है। चुनाव में राजनीतिक दल इन धार्मिक और सामाजिक संगठनों से संवाद बनाए रखते हैं।
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