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पंजाब में पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट लागू: गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना, नशा तस्करों पर कसेगा शिकंजा

Sun, 25 Oct 2026 02:17 PM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट यानी प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकना है। डिटेल में पढ़ें खबर...
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पंजाब में पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट लागू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पंजाब में अब नशा तस्करों पर और सख्ती से नकेल कसी जा सकेगी। सूबे में नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट, 1988 लागू कर दिया है। नशा तस्करों और संदिग्ध लोगों को निवारक हिरासत (नजरबंदी) में रखने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए पंजाब के गृह विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत पुलिस कमिश्नरों और पुलिस रेंज के प्रभारी आईजी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारियों को अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करने की शक्ति दी गई है।

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जिन पुलिस कमिश्नरेट, रेंज और मुख्यालय इकाइयों में आईजी रैंक का अधिकारी उपलब्ध नहीं है, वहां छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को भी विशेष रूप से अधिकृत किया गया है। इनमें विशेष डीजीपी एएस राय, एडीजीपी गौतम चीमा, शिव वर्मा, कौस्तुभ शर्मा, नौनिहाल सिंह और आईजीपी एस. भूपति शामिल हैं। इन अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र डीजीपी निर्धारित करेंगे।
 

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20 अक्तूबर को अपने पंजाब दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ कार्रवाई में इस कानून के इस्तेमाल का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। शाह ने सवाल किया था कि देश में पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत 929 मामले दर्ज होने के बावजूद पंजाब में एक भी मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ। अब पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने निर्धारित क्षेत्र में नशा तस्करों को निवारक हिरासत में रखने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा। इससे पहले इस प्रक्रिया में गृह सचिव की मंजूरी की जरूरत पड़ती थी। अब यह अधिकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दिया गया है।

क्या है पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट?
पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट यानी प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकना है। इसके तहत सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति को ऐसे अवैध कारोबार में आगे संलिप्त होने से रोकने के लिए निवारक हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है। कानून में निर्धारित परिस्थितियों और प्रक्रिया के अधीन हिरासत की अवधि एक वर्ष तक हो सकती है। यह एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज सामान्य आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से अलग प्रावधान है।

शाह के दबाव में जागी सरकार : ढिल्लों
पंजाब में पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई को लेकर भाजपा ने चुटकी ली है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दबाव के बाद ही मान सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ इस कानून के इस्तेमाल की पहल की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से दो बार यह मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकार ने अधिसूचना जारी की, जो नशे के खिलाफ कार्रवाई में देरी को उजागर करती है। ढिल्लों के मुताबिक, इस कानून के तहत नशा तस्करों को एक साल तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है। भाजपा ने 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का दावा भी किया।
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