घर की छत पर मिट्टी का तेल लेकर बैठते थे सुभाष चावला के पिता
चंडीगढ़ की राजनीति में अपनी पहचान रखने वाले सुभाष चावला ने अपने परिवार के संघर्ष की कहानी साझा की। उनके दादा सुंदर सिंह चावला पाकिस्तान के सर्वाेदय जिले के रहने वाले थे। विभाजन के समय, कत्लेआम और महिलाओं के अपमान से बचने के लिए उनके पिता हरबंसलाल चावला अपने घर की छत पर मिट्टी का तेल लेकर बैठते थे। उनकी योजना थी कि अगर कोई बदमाश घर में घुसने की कोशिश करे तो वे अपने परिवार की महिलाओं को बचाने के लिए खुद को आग लगा लेंगे।
चंडीगढ़ में की नई शुरुआत
यह परिवार पाकिस्तान से बचकर पहले हरियाणा के रोहतक जिले के गूगहेड़ी गांव पहुंचा और फिर 1950 में चंडीगढ़ आ गया। यहां उनके दादा, पिता और भाइयों ने मिलकर छोटे-मोटे काम शुरू किए। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने शहर में कई उद्योग और व्यापार स्थापित किए। विभाजन के दर्द से गुजरने के बावजूद अपने साहस और मेहनत के दम पर एक नई और सफल जिंदगी की नींव रखी।