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अर्जुन पुरस्कार: पंजाब के खिलाड़ियों की झोली खाली, पिछले साल था दबदबा; इस बार मायूसी

Tue, 18 Aug 2026 10:08 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

चयन प्रक्रिया के शुरुआती दौर में पंजाब से जुड़े कई खिलाड़ियों के नाम चर्चा में थे। चयन समिति ने पहले 24 खिलाड़ियों की सिफारिश की थी लेकिन खेल मंत्रालय की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची 17 नामों तक सिमट गई।
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अर्जुन अवॉर्ड - फोटो : Twitter
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विस्तार
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राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की सूची ने खेलों में मजबूत पहचान रखने वाले पंजाब को इस बार निराश किया है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के प्रदर्शन के आधार पर 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा की है लेकिन इनमें पंजाब का एक भी खिलाड़ी शामिल नहीं है। इस बार पंजाब के खिलाड़ियों की झोली खाली रह गई है।
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चयन समिति ने पहले की थी 24 खिलाड़ियों की सिफारिश
खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया के शुरुआती दौर में पंजाब से जुड़े कई खिलाड़ियों के नाम चर्चा में थे। चयन समिति ने पहले 24 खिलाड़ियों की सिफारिश की थी लेकिन खेल मंत्रालय की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची 17 नामों तक सिमट गई। पहली सूची में हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल, कबड्डी खिलाड़ी सुरजीत और पूजा समेत कई नाम शामिल थे। 

अंतिम सूची में राजकुमार पाल और सुरजीत का नाम जरूर है लेकिन इन्हें पंजाब के खिलाड़ी के तौर पर नहीं गिना जा सकता। राजकुमार पाल उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं जबकि सुरजीत हरियाणा के रहने वाले हैं। इसी कारण इस बार पंजाब के खाते में कोई अर्जुन पुरस्कार नहीं आया। पिछले राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में राज्य के खिलाड़ियों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। 
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साल 2024 के राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में जालंधर के हॉकी खिलाड़ी और भारतीय टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। वहीं, हॉकी खिलाड़ी जर्मनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह को अर्जुन पुरस्कार मिला था। एथलेटिक्स में सुच्चा सिंह को अर्जुन पुरस्कार (लाइफटाइम) से सम्मानित किया गया था। 

क्या बोले परगट सिंह?
इन पुरस्कारों की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह कहते हैं कि केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय पुरस्कारों में पंजाब की खाली झोली राज्य के खेल तंत्र के लिए आत्ममंथन का विषय जरूर है। हालांकि इसे सीधे पंजाब के खिलाड़ियों की उपलब्धियों में कमी के तौर पर देखना भी उचित नहीं होगा। कई खिलाड़ी राष्ट्रीय टीमों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। चुनौती यह है कि अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से जगह मिले।
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