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साइकोट्रोपिक ड्रग्स का जाल: हिमाचल, गुजरात और देहरादून से पंजाब तक फैला, 44 कंपनियां एएनटीएफ के रडार पर

Tue, 03 Jun 2025 12:54 PM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब में नशीली दवाईयों व कैप्सूल के चलन को रोकने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स तकनीकी और जॉइंट ऑपरेशन के जरिए इस नेटवर्क को तोड़ने का काम कर रही है। ड्रग्स के इस नेटवर्क में शामिल कई मेडिकल ऑफिसरों, ड्रग्स इंस्पेक्टरों और केमिस्ट संचालकों को पुलिस दबोच भी चुकी है।
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Drugs, ड्रग्स - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब में साइकोट्रोपिक ड्रग्स का जाल फैलता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के बद्दी, गुजरात और देहरादून से ये नेटवर्क पंजाब तक ऑपरेट किया जा रहा है। 

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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के एडीजीपी निलाभ किशोर ने बताया कि पंजाब में सिर्फ बॉर्डर पार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाली ड्रग्स ही बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय सीमाओं से बड़े पैमाने पर आने वाली साइकोट्रोपिक ड्रग्स युवाओं को चंगुल में दबोच रही है। एडीजीपी ने बताया कि हिमाचल के बद्दी, गुजरात और देहरादून में बिना लाइसेंस के कई दवाई बनाने वाली फैक्टरी इन ड्रग्स के नेटवर्क में शामिल हैं। कुछ दवाई बनाने वाली पंजीकृत फार्मा कंपनियां भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। 

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एडीजीपी ने कहा कि 44 के करीब ऐसी कंपनियां उनके रडार पर हैं। कई फैक्टरियों को संबंधित राज्य सरकारों को लिखकर बंद भी कराया गया है। एडीजीपी ने बताया कि पुलिस एक मार्च से अब तक 25.70 लाख नशे की गोलियां व कैप्सूल बरामद कर चुकी है।

इन दवाओं की खेप के पीछे का नेटवर्क ज्यादातर मामलों में बद्दी, गुजरात और देहरादून से जुड़ता पाया गया है। एडीजीपी ने बताया कि पंजाब में नशीली दवाईयों व कैप्सूल के चलन को रोकने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स तकनीकी और जॉइंट ऑपरेशन के जरिए इस नेटवर्क को तोड़ने का काम कर रही है। ड्रग्स के इस नेटवर्क में शामिल कई मेडिकल ऑफिसरों, ड्रग्स इंस्पेक्टरों और केमिस्ट संचालकों को पुलिस दबोच भी चुकी है।

इस वजह से बढ़ रहा साइकोट्रोपिक ड्रग्स का चलन

साइकोट्रोपिक ड्रग्स के आसानी से उपलब्ध हो जाने और सस्ती होने के कारण युवाओं में इसका चलन बढ़ रहा है। आमतौर पर इस ड्रग्स को बिना डॉक्टर की पर्ची के कैमिस्ट वाले नहीं देते लेकिन अब राज्य में चोरी छिपे इन दवाइयों को ड्रग्स के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार जो व्यक्ति इन ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं, इससे उनकी मानसिक अवस्था काफी प्रभावित होती है। अक्सर हेरोइन व अन्य किस्म के ड्रग्स का सेवन करने वाला व्यक्ति ही इन ड्रग्स का उपयोग करते हैं। जेलों में भी इन गोलियों व कैप्सूल की पहुंच होने लगी है।

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