सेक्टर-30 के ज्योतिषी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि नागपंचमी भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का विशेष पर्व है। इस दिन नाग देवता के पूजन से भय और संकट से मुक्ति की कामना की जाती है।
नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का विशेष संयोग 17 अगस्त को श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष अवसर लेकर आया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नागपंचमी पर शुभ योग, रवि योग और सूर्य के राशि परिवर्तन का संयोग बन रहा है। इसे भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है। शहर के प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और नाग देवता का पूजन हो रहा है।
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सेक्टर-46 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-45 की गोशाला के शिवालय और सेक्टर-11 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में विशेष पूजा हुई। श्रद्धालु दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना कर रहे हैं।
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सेक्टर-15 के पंडित राम बहादुर मिश्र के अनुसार सर्प दोष या कालसर्प दोष से जुड़ी परेशानियों की शांति के लिए श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं।
सेक्टर-20 स्थित गुग्गामाड़ी श्री हनुमान मंदिर के प्रमुख पंडित किशोरी लाल ने बताया कि इस दिन सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश का भी संयोग है। वहीं सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए विभिन्न द्रव्यों से भगवान शिव के अभिषेक की परंपरा है।