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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट: पंजाब में भूमि विवाद नेशनल हाईवे परियोजनाओं में बने बड़ी बाधा

Thu, 26 Dec 2024 03:57 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

लुधियाना-बठिंडा प्रोजेक्ट को तीन फेज में पूरा किया जाना है। 30.3 किलोमीटर के पैकेज-1 के लिए 100 प्रतिशत भूमि का कब्जा लिया जा चुका है। 45.24 किलोमीटर के पैकेज-2 के लिए 92.04 प्रतिशत भूमि का कब्जा लिया गया है, जबकि 25.4 किलोमीटर के सदर्न लुधियाना बाईपास के लिए सिर्फ 88.9 प्रतिशत भूमि का ही कब्जा लिया जा सका है।
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अधूरा पड़ा दिल्ली कटरा एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में भूमि संबंधित विवाद नेशनल हाईवे परियोजनाओं में बड़ी बाधा बन रहे हैं। तीन साल में राज्य को 38 नेशनल हाईवे परियोजनाओं की सौगात मिली है। 

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हालत यह है कि केवल 16 परियोजनाओं पर ही 50 फीसदी से अधिक काम हुआ है, जबकि 22 परियोजनाएं पर धीमी गति से काम चल रहा है। यहां तक कि लुधियाना-बठिंडा हाईवे परियोजना की लागत भी बढ़ गई है। साथ ही केंद्र ने प्रदेश की एक और नेशनल हाईवे परियोजना को रद्द कर दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

मंत्रालय की तरफ से संसद में यह रिपोर्ट पेश की गई है। इसके अनुसार पहले पंजाब की तीन परियोजनाओं को भूमि संबंधित विवादों के चलते रद्द कर दिया गया था, लेकिन अब एक और परियोजना रद्द कर दी गई है। इनमें खरड़ तक बनने वाला लुधियाना-रूपनगर हाईवे, सदर्न लुधियाना बाईपास, अमृतसर-घोमान टांडा पैकेज-2 और दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा फेज-1 स्पर-2 शामिल हैं। 134.03 किलोमीटर लंबाई की ये चार परियोजनाओं को 4712.46 करोड़ रुपये में पूरा किया जाना था, लेकिन इनके रद्द होने से राज्य को एक बड़ा झटका लगा है।
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रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना-बठिंडा प्रोजेक्ट को तीन फेज में पूरा किया जाना है। 30.3 किलोमीटर के पैकेज-1 के लिए 100 प्रतिशत भूमि का कब्जा लिया जा चुका है। 45.24 किलोमीटर के पैकेज-2 के लिए 92.04 प्रतिशत भूमि का कब्जा लिया गया है, जबकि 25.4 किलोमीटर के सदर्न लुधियाना बाईपास के लिए सिर्फ 88.9 प्रतिशत भूमि का ही कब्जा लिया जा सका है। मंत्रालय के अनुसार प्रोजेक्ट में देरी के कारण इसकी लागत बढ़ना तय है, लेकिन कॉरिडोर का काम पूरा होने के बाद ही पता लगाया जा सकेगा कि इसकी कॉस्ट कितनी बढ़ी है।

दिल्ली-कटड़ा-अमृतसर (डीएके) फेज-1 पैकेज-9 का 57.82%, डीएके फेज-1 पैकेज-7 का 89.33%, डीएके फेज-1 पैकेज-10 का 61.72% काम हुआ है। इसी तरह अमृतसर एयरपोर्ट जंक्शन नेशनल हाईवे-354 पैकेज-4 का 69%, अमृतसर बाईपास पैकेज-3 का 66.68%, आईटी सिटी चौक से कुराली चंडीगढ़ रोड सेक्शन का 71%, मलोट-डबवाली बाईपास 94% और लुधियाना रूपनगर पैकेज-3 नेशनल हाईवे 205के सेक्शन का 63% काम पूरा हुआ है।

इन परियोजनाओं पर 50 % से आगे नहीं बढ़ा काम  

प्रोजेक्ट                                                          इतने प्रतिशत हुआ काम
अमृतसर-घोमान-टांडा-ऊना सेक्शन पैकेज - 1 :                36%
दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा फेज-1 स्पर-3 :                       23.73%
अमृतसर-बठिंडा पैकेज-1 एनएच-754ए :                    31.56%
लुधियाना-रूपनगर पैकेज-1 एनएच-205के :                 15.31%
जालंधर बाईपास                         :                       30.02%
दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा, अमृतसर कनेक्टिविटी स्पर-1 :    15.35%
अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड             :                          33%

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अमृतसर-बठिंडा पैकेज-2 एनएच754ए :                        22%
अबोहर-फाजिल्का सेक्शन एनएच-7            :                 36%

हाईकोर्ट ने दिए निर्देश, बिना बाधा जमीन का दिलाएं कब्जा  

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के पंजाब में रुके प्रोजेक्ट जल्द पूरा करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह ही विभिन्न हितधारकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया था कि दो महीने में प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक पूरी जमीन का कब्जा एनएचएआई को दिलाया जाए। एनएचएआई ने याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण मुआवजे का वितरण नहीं कर रही है और कोर्ट के निर्देश के बावजूद पुलिस सहायता प्रदान करने में विफल रही है।

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