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Indian Army: जवानों तक सैन्य रसद पहुंचने में नहीं होगी देरी, गड़बड़ियों पर लगाम; सेना ने तैयार किया खास पोर्टल

Tue, 10 Feb 2026 04:24 PM IST
अंकेश ठाकुर मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

भारतीय सेना ने एक खास पोर्टल तैयार किया है जो इस सारी प्रक्रिया को संघटित करते हुए इसमें पारदर्शिता बढ़ाएगा। यूनिट स्तर से लेकर सेना मुख्यालय तक आला अफसर भी इसके जरिये सेना रसद प्रणाली की निगरानी कर सकेंगे।
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सेना। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेना की यूनिटों, कोर, कमांड व दुर्गम क्षेत्रों में तैनात टुकड़ियों को सैन्य रसद की आपूर्ति में अब देरी नहीं होगी। इस प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों पर भी लगाम कसेगा जबकि इसकी रियल टाइम जानकारी भी डैशबोर्ड के जरिये अपडेट होती रहेगी। इसके लिए सेना ने एक खास पोर्टल तैयार किया है जो इस सारी प्रक्रिया को संघटित करते हुए इसमें पारदर्शिता बढ़ाएगा। यूनिट स्तर से लेकर सेना मुख्यालय तक आला अफसर भी इसके जरिये सेना रसद प्रणाली की निगरानी कर सकेंगे।

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सैन्य यूनिटों तक विभिन्न रसद सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी मूल रूप से दो विंगों की होती है। एक विंग जवानों के लिए रोजमर्रा संबंधी सामग्री की आपूर्ति करती है जबकि दूसरी विंग युद्धक गाड़ियों से लेकर गोला-बारूद, जवानों की वर्दी, बूट, बैडिंग इत्यादि चीजें उपलब्ध करवाती है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एएससी व ऑर्डिनेंस इत्यादि विभागों से संबंधित रसद सामग्रियों की संख्या काफी ज्यादा होती है।

हर यूनिट से लेकर मुख्यालय स्तर तक किसी न किसी रसद की डिमांड जेनरेट होती रहती है, लिहाजा दोनों विंग इस प्रक्रिया में निरंतर जुटी रहती हैं। चूंकि अभी तक सेना रसद प्रणाली मैनुअल थी, लिहाजा इसमें काफी समय लगता था और गड़बड़ियों की आशंका भी ज्यादा रहती थी।
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मुश्किल होती थी निगरानी
सैन्य रसद की डिमांड जेनरेशन से लेकर उसकी अप्रूवल, कलेक्शन और डिलीवरी तक काफी काम दस्तावेजी होता है। जिसमें समय भी काफी लगता था और इसकी निगरानी भी बमुश्किल हो पाती थी। इस देरी की वजह से दुर्गम क्षेत्र में तैनात यूनिटों और जवानों की टुकड़ियों तक समय पर रसद पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना रहता है। अब सेना ने एक विशेष पोर्टल के जरिये इस सारी प्रक्रिया को इंटीग्रेट करने का प्रयास किया है। इस पोर्टल (डीआईएमई) को सेना ने भास्कर आचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स के साथ मिलकर विकसित किया है। सैन्य रसद की खरीद से लेकर डिलीवरी तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी होती रहेगी।

कागजों में नहीं उलझेगी रसद आपूर्ति
एक सैन्य अफसर ने बताया कि इस पोर्टल से इस प्रक्रिया की करीब 70 फीसदी कागजी कार्यवाही खत्म हो जाएगी। किसी भी स्तर पर गड़बड़ियों का अलर्ट भी इससे मिलता रहेगा। यूनिटों, कोर, कमांड, थिएटर व मुख्यालय स्तर के पास सैन्य रसद का कितना भंडार पड़ा है, कितना होना चाहिए, कम है या पर्याप्त, इत्यादि जानकारियां डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेंगी। पारदर्शिता के साथ-साथ रसद की कमी का समय पर मालूम चलने के बाद उसकी खरीद संबंधी प्रक्रिया भी समय से पहले शुरू की जा सकेगी। यह पहल मिलिट्री लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण में एक बड़ी प्रगति मानी जा रही है।

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