पंजाब सरकार ने पिछले वर्ष प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक पॉलिसी जारी की थी। बावजूद इसके लोग ई-वाहनों को लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। राज्य में अगर कुल 100 वाहन बिक रहे हैं, तो उनमें इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या सिर्फ छह है, जबकि पेट्रोल व डीजल वाहनों की बंपर बिक्री जारी है। चंडीगढ़ प्रशासन की ई-वाहनों की बिक्री को लेकर तैयारी की गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
राज्य सरकार की तरफ से फरवरी 2023 में इलेक्ट्रिक पॉलिसी जारी की गई थी। इसका मकसद ई-वाहनों को बढ़ावा देने के साथ ही इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने, इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, निर्माता इकाइयों को प्रदेश में आकर्षित करना था। तीन साल के लिए जारी की गई पॉलिसी में दोपहिया वाहनों के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक इन्सेंटिव जारी करने की योजना थी। इसके अलावा तीन पहिया और ई-साइकिल समेत अन्य वर्ग के लिए भी अलग-अलग इन्सेंटिव तय किया गया था। हर साल नीति की समीक्षा करने का फैसला लिया गया था। अभी तक प्रदेश में ई-वाहनों को अधिक बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है और पॉलिसी को दो साल भी होने जा रहे हैं, इसे ध्यान में रखते हुए सरकार जल्द ही पॉलिसी की समीक्षा कर सकती है।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण केंद्र ने प्रदेश के 9 शहरों को सबसे अधिक प्रदूषित (गैर प्राप्ति शहर) शहरों की सूची में शामिल किया हुआ है। इनमें डेराबस्सी, गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, नया नंगल, पठानकोट, पटियाला और अमृतसर शामिल हैं।