पंजाब सरकार ने लैंड पूलिंग नीति में संशोधन कर किसानों और भूमि मालिकों को मिलने वाले विकसित भूखंड का हिस्सा बढ़ाकर बड़ी राहत दी है। इसके बाद चंडीगढ़ के किसानों की भी उम्मीदें जगी हैं, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन फिलहाल शहर में ऐसी नीति लागू करने के पक्ष में नजर नहीं आ रहा।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद का कहना है कि चंडीगढ़ की अधिकांश 2,500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। शेष भूमि में 700 से 800 एकड़ ग्रीन एरिया के रूप में सुरक्षित रखना अनिवार्य है। इसके अलावा 250 से 300 एकड़ में आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाने हैं, जबकि करीब 700 एकड़ भूमि संस्थानों, चिकित्सा सुविधाओं, व्यावसायिक परियोजनाओं और अन्य सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासन का मानना है कि मौजूदा मास्टर प्लान के तहत लैंड पूलिंग नीति लागू करने की पर्याप्त संभावना नहीं बनती।
अधिकतर भूमि पहले ही अधिग्रहित
700-800 एकड़ ग्रीन एरिया के लिए आरक्षित
250-300 एकड़ आवासीय विकास के लिए प्रस्तावित
700 एकड़ संस्थानों, मेडिकल और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए निर्धारित
प्रशासन का मानना है कि मास्टर प्लान के कारण लैंड पूलिंग लागू करना फिलहाल संभव नहीं
पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी लैंड पूलिंग नीति लागू हो