'मेरा तो एक बेटा चला गया, लेकिन वह ऐसा काम करके गया कि पता नहीं कितने और बेटों को बचा गया।' मानसा में परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह ने यह कहते हुए बेटे के संघर्ष को याद किया। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और आरोपी को कड़ी सजा मिले।
लोगों के मुताबिक, हत्याकांड के मुख्य आरोपी अश्वनी ने पहले अपने पिता के साथ करियाना दुकान चलाई। अपेक्षित आमदनी नहीं होने पर उसने 2008 में अपने नाम पर फार्मेसी लाइसेंस लेकर घर के पास मेडिकल स्टोर खोला। बाद में दुकान मुख्य बाजार में शिफ्ट कर ली। लोगों ने आरोप लगाया कि वहां बड़े स्तर पर नशीली दवाएं बेची जाती थीं। इन आरोपों की पुष्टि जांच से होनी बाकी है।
2023 में बढ़ी थी रंजिश
लोगों का दावा है कि 2023 में परविंदर झोटा और उसके साथियों ने अश्वनी को कथित तौर पर नशा बेचते पकड़ा था और जूतों का हार पहनाकर शहर में घुमाया था। इसके बाद दोनों के बीच रंजिश बढ़ गई। पुलिस पूछताछ में अश्वनी के हवाले से सामने आया कि उसने झोटा पर गोली इसलिए चलाई, क्योंकि उसे आशंका थी कि झोटा और उसके साथी उसकी पिटाई कर देंगे।
धरने के दौरान भी नशा बिकने का दावा
झोटा के समर्थन में चल रहे धरने के दौरान एक युवक के नशीले कैप्सूल और चिट्टा लेकर पहुंचने का दावा किया गया। इससे युवाओं में नाराजगी बढ़ी। वक्ताओं ने कहा कि नशा नहीं रुका तो युवा खुद तस्करों को पकड़ने के लिए टीमें बनाने पर विचार करेंगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, झोटा कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों से नशीली दवाओं की बिक्री के सबूत जुटाकर पुलिस को बुलाता था। उन्होंने कुछ दुकानदारों की कथित मिलीभगत पर भी सवाल उठाए।
पत्नी छह दिन के रिमांड पर
एसएसपी वैभव चौधरी ने बताया कि आरोपी अश्वनी की पत्नी नीलम को अदालत ने छह दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पंजाब बंद के दौरान मानसा में हुई घटनाओं को लेकर भी पुलिस ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। डिप्टी कमिश्नर नवजोत कौर के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मिलीभगत सामने आने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने पुष्टि की कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस अश्वनी के नाम पर था। झोटा अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बेटों और माता-पिता को छोड़ गया है। आरोपी की दुकान वाली जगह पर लगाए गए पोस्टर पर लिखा है- मेरी मौत पर नहीं रोना, मेरी सोच को आगे बढ़ाना।