विदेश भेजने के नाम पर ट्रैवल एजेंट की ठगी का शिकार हुए जालंधर निवासी हरदीप कुमार की करीब तीन साल बाद कंबोडिया से सुरक्षित भारत वापसी हो गई है। परिवार ने यह मामला राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के ध्यान में लाया था, जिसके बाद उनके कार्यालय की ओर से विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क कर हरदीप की वापसी के लिए मदद की मांग की गई।
परिवार के अनुसार, हरदीप कुमार को पुर्तगाल भेजने का भरोसा देकर एक ट्रैवल एजेंट ने उससे करीब साढ़े 7 लाख रुपये लिए थे। हालांकि, पुर्तगाल भेजने के बजाय उसे पहले थाईलैंड और फिर कंबोडिया भेज दिया गया। परिवार का आरोप है कि कंबोडिया पहुंचने के बाद उसका पासपोर्ट भी उसे वापस नहीं दिया गया। मई 2025 में उसका वीजा समाप्त हो गया।
निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे हरदीप कुमार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कंबोडिया में रहते हुए वह एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गया, जिसमें उसकी टांग टूट गई। हादसे के बाद उसे लंबे समय तक उचित इलाज और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल सकीं। उसने करीब 15 महीने बेहद मुश्किल परिस्थितियों में गुजारे।
नाै जून को परिवार ने संत सीचेवाल से लगाई थी मदद की गुहार
हरदीप कुमार का परिवार 9 जून को राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के पास पहुंचा और उसे कंबोडिया से सुरक्षित वापस लाने के लिए मदद की अपील की। मामले की गंभीरता को देखते हुए संत सीचेवाल की ओर से विदेश मंत्रालय को ई-मेल के माध्यम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो मामला दोबारा विदेश मंत्रालय के ध्यान में लाया गया। इसके साथ ही कंबोडिया स्थित भारतीय मिशन के साथ समन्वय कर हरदीप कुमार की सहायता और सुरक्षित वापसी के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।
इसके बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की गई और आखिरकार 29 अगस्त को हरदीप कुमार सुरक्षित भारत लौटकर अपने परिवार के पास पहुंच गया।
परिवार ने संत सीचेवाल का जताया आभार
हरदीप कुमार के परिवार ने उसकी सुरक्षित वापसी के लिए मामला विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने तथा लगातार पैरवी करने के लिए संत बलबीर सिंह सीचेवाल का आभार जताया।
संत सीचेवाल ने विदेश जाने वाले युवाओं से अपील की कि वे झूठे वादों और गैर-कानूनी तरीकों से विदेश भेजने वाले एजेंटों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी एजेंट पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उसकी पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए और कानूनी एवं सरकारी तौर पर प्रमाणित माध्यम से ही विदेश जाने को प्राथमिकता देनी चाहिए।