पंजाब सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया भुगतान के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार की ओर से पेश दलीलों से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में उठाए गए कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है। अदालत ने सुनवाई मंगलवार 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपेंद्र सिंह पटवालिया ने कहा कि डीए और डीआर के भुगतान के मामले में पंजाब सरकार केंद्र सरकार की नीति अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। राज्य में इस संबंध में अलग वैधानिक नियम लागू हैं और सरकार उन्हीं के अनुरूप निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
सरकार की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बकाया भुगतान और राज्य के रुख को लेकर कई सवाल उठाए। अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी और मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई का निर्णय लेते हुए सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी। कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से दायर याचिकाओं में केंद्र सरकार की तर्ज पर लंबित डीए और डीआर का लाभ समय पर देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से बकाया भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।