अमेरिका और ईरान संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़ने का भी असर
अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिमल अंजुम ने बताया कि हाल ही में अमेरिका और ईरान संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़े हैं। इस कारण सभी घरेलू चीजों के दामों में वृद्धि हुई है। हाल ही में डेयरी उत्पादों में भी वृद्धि देखने को मिली थी। इस सबका असर सूबे की महंगाई दर बढ़ने पर पड़ा है। हालांकि दूसरे कई राज्यों के मुकाबले प्रदेश की स्थिति अभी भी ठीक है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई बढ़ोतरी
इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पंजाब में जून के दौरान सीपीआई बढ़कर 107.41 हो गया है, जो मई में 106.20 था। सबसे अधिक सीपीआई 109.53 तेलंगाना में दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में बढ़ोतरी हुई है। मई में यह 105.91 था, जो जून में बढ़कर 107 हो गया है।
सीपीआई एक तरह का पैमाना है जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।
सूबे में लगातार कर्ज का भी बढ़ रहा बोझ
वर्ष 2024-25 में पंजाब पर 3.79 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो 2026-27 तक 4.47 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज अदायगी में खर्च हो रहा है। हालांकि सरकार को जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।