जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन
अपनी प्रतिभा को और निखारने के लिए हरमनप्रीत 2011 में जालंधर के सुरजीत अकादमी में शामिल हुए। जहां उन्होंने सीनियर गगनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह से काफ़ी गुण सीखे, जो पेनल्टी कॉर्नर के स्पेशलिस्ट माने जाते थे। जूनियर कैंप के दौरान कोचों की नजर उनकी काबिलियत पर पड़ी। भारतीय जूनियर हॉकी टीम के पूर्व कोच हरिंदर सिंह ने पहले ही कहा था कि दो साल में हरमनप्रीत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ़्लिकर बन सकते हैं।
जोहोर कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
हरमनप्रीत ने साल 2011 में सुल्तान जोहोर कप में जूनियर नेशनल टीम के लिए डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने मैदान पर गोल की बारिश कर दी। तीन साल बाद हरमनप्रीत ने 2014 सुल्तान जोहोर कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता। जहां उन्होंने मलेशिया में यूथ टूर्नामेंट में नौ गोल किए और भारत को शीर्ष पुरस्कार जीतने में मदद की। इस प्रदर्शन के आधार पर 3 मई, 2015 को एक टेस्ट सीरीज़ के दौरान उन्होंने जापान के खिलाफ मैदान में कदम रखा।
रियो में ओलंपिक डेब्यू
हरमनप्रीत ने युवा टीम के लिए भी खेलना जारी रखा और 2015 में जूनियर पुरुष एशिया कप का खिताब जीता, जहां उन्होंने 14 गोल किए। सीनियर स्तर पर, हरमनप्रीत ने 2016 में सुल्तान अजलान शाह कप के दौरान भारत के लिए अपना पहला गोल किया। इस प्रदर्शन की बदौलत उन्हें रियो 2016 खेलों के लिए ओलंपिक टीम में जगह मिल गई। हरमनप्रीत ने 2016 जूनियर विश्व कप जीतकर अपने हुनर को साबित किया। हरमनप्रीत ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को रजत पदक जीतने में भी अहम भूमिका निभाई।
200 मैचों में 150 से अधिक गोल
राष्ट्रीय टीम के लिए लगभग 200 मैचों में 150 से अधिक गोल करने के बाद, हरमनप्रीत सिंह ने हांगझोऊ में एशियन गेम्स 2023 में टीम को स्वर्ण पदक दिलाया, जिससे भारत ने पेरिस 2024 ओलंपिक गेम्स में भी अपनी जगह पक्की की थी। हरमनप्रीत सिंह हांगझोऊ में 13 गोल के साथ भारत के सर्वोच्च स्कोरर रहे, जिसमें जापान के खिलाफ स्वर्ण पदक मैच में उनके दो गोल शामिल थे। उन्होंने टीम को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2023 का खिताब भी दिलाया था।