भारतीय सेना के नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह मरणोपरांत छह मरीजों को नया जीवन देंगे। लद्दाख में 16,000 फीट की ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में वे ब्रेन स्ट्रोक के शिकार हो गए थे। उनकी पत्नी कुसुम ने अद्भुत साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनके अंगदान का फैसला लिया है। उन्हें 21 जुलाई को कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर में 'ब्रेन डेड' घोषित किया गया।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ के थे वीरेंद्र सिंह
नायब सूबेदार मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित कनीना गांव के रहने वाले थे। ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होने के बाद उन्हें तत्काल प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की गई और एयर एम्बुलेंस के माध्यम से 16 जुलाई को कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर लाया गया था। वहां चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह की बेटियों को तिरंगा देते सैन्य अफसर
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अब मरणोपरांत नायब सूबेदार की दो किडनी, एक यकृत (लिवर), दोनों फेफड़े, दोनों कॉर्निया व ऊतकों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया, जिससे विभिन्न अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन मिला। कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब फेफड़ों का सफल निष्कर्षण किया गया।
प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय सेना के नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह के सर्वोच्च बलिदान व उनकी पत्नी कुसुम के इस निस्वार्थ एवं प्रेरणादायी निर्णय को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है। उनका यह मानवीय योगदान करुणा, साहस और सेवा-भाव का अनुपम उदाहरण है जो समाज में अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा।
कमांड अस्पताल चंडीमंदिर में किए अंगदान
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विभिन्न राज्यों में भेजे गए अंग
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नेटवर्क के माध्यम से इन अंगों का आवंटन पात्र मरीजों को किया गया। एक किडनी तथा दोनों कॉर्निया का प्रत्यारोपण कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) में किया गया। दूसरी किडनी हरियाणा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, हरियाणा को भेजी गई। यकृत (लिवर) को आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली व दोनों फेफड़ों को केआईएमएस, हैदराबाद भेजा गया। अंगों के समयबद्ध एवं सुरक्षित परिवहन के लिए सैन्य पुलिस, नागरिक प्रशासन व स्थानीय प्राधिकरणों के समन्वय से ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किया गया।